
पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बार ठगों ने भारतीय सेना के 82 साल के एक रिटायर्ड कर्नल और उनकी पत्नी को अपना शिकार बना लिया। खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाया और उनसे 3.4 करोड़ रुपये ठग लिए।
पीड़ित दंपति ने जब इस घटना की शिकायत पुलिस को दी, तो पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है।
कैसे हुई ठगी?
रिटायर्ड कर्नल दिलीप सिंह और उनकी पत्नी रविंदर कौर ने बताया कि 18 मार्च को उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को ED का अधिकारी बताया और कहा कि वह 5,038 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच कर रहा है।
इसके बाद, ठग ने कर्नल पर मुंबई के केनरा बैंक के एक अकाउंट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल होने का आरोप लगाया। यह सुनकर कर्नल और उनकी पत्नी घबरा गए। ठगों ने उन्हें डराया कि अगर वे सहयोग नहीं करेंगे, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल गिरफ्तारी का झांसा देकर पैसे निकलवाए
इसके बाद, ठगों ने कर्नल और उनकी पत्नी को घर में ही रहने और अपने फोन हमेशा चालू रखने का आदेश दिया। यह सिलसिला 18 मार्च से 27 मार्च तक, यानी पूरे 10 दिन तक चला। इस दौरान, ठगों ने दंपति को पूरी तरह से डिजिटल रूप से बंधक बना लिया, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें।
इसी दौरान, ठगों ने अलग-अलग बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए उनके खाते से 3.4 करोड़ रुपये निकलवा लिए। जब ठगों ने पैसे ट्रांसफर करवा लिए, तो वे अचानक संपर्क से गायब हो गए।
जब पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ
जब कर्नल दिलीप सिंह को एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं, तो उन्होंने तुरंत चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इसके अलावा, उन्होंने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई।
उन्होंने बताया कि उनके दोनों बेटे पहले ही दुनिया से जा चुके हैं और अब वे अपनी बची हुई जिंदगी के लिए इन पैसों पर निर्भर थे। उन्होंने सरकार और पुलिस से अनुरोध किया कि उनके पैसे जल्द से जल्द वापस दिलवाए जाएं।
पुलिस जांच में जुटी
इस घटना के सामने आते ही चंडीगढ़ पुलिस और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि इस ठगी में एक बड़ा साइबर गिरोह शामिल हो सकता है, जो लोगों को ED, बैंक अधिकारी या सरकारी अफसर बनकर ठगता है।
कैसे बचें ऐसी ठगी से?
इस तरह की साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है:
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ED, बैंक, या पुलिस अधिकारी फोन पर कभी भी पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहते।
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अगर कोई भी संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत उसे काटकर पुलिस या संबंधित संस्था से संपर्क करें।
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किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक डिटेल्स, OTP या पासवर्ड न दें।
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व्हाट्सएप कॉल्स और ऑनलाइन वीडियो कॉल्स से भी ठग लोगों को फंसाने की कोशिश करते हैं, सतर्क रहें।
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अगर किसी पर साइबर ठगी का शक हो, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत करें।
इस घटना ने साबित कर दिया है कि साइबर ठग अब बड़े और पढ़े-लिखे लोगों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। चंडीगढ़ पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और ठगों को पकड़ने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।
लोगों को सतर्क रहने और ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरूक रहने की जरूरत है। अगर आपको भी इस तरह की कोई कॉल आए, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें और किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों में न आएं।