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भारत में 90% लोग अपनी जरूरतों के अलावा कुछ भी खरीदने की क्षमता नहीं रखते। यह दावा ब्लूम वेंचर्स की इंडस वैली एनुअल रिपोर्ट 2025 में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 10% लोग ही सबसे ज्यादा खर्च करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। ये 13-14 करोड़ लोग, जो कि मेक्सिको की पूरी आबादी के बराबर हैं, देश की तरक्की में सबसे बड़ा योगदान दे रहे हैं।
अमीर और अमीर हो रहे, गरीब और गरीब!
🔹 भारत की टॉप 10% आबादी देश की 57.7% कमाई को नियंत्रित करती है, जबकि सबसे गरीब 50% लोगों की कमाई का हिस्सा घटकर सिर्फ 15% रह गया है।
🔹 इसका मतलब यह है कि अमीरों की संपत्ति लगातार बढ़ रही है, लेकिन नए लोग इस अमीर वर्ग में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
🔹 रिपोर्ट के अनुसार, 30 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्होंने हाल ही में खर्च करना शुरू किया है, लेकिन वे अभी भी अपने बजट को लेकर सतर्क हैं।
खर्च करने वाला वर्ग क्यों नहीं बढ़ रहा?
📉 लोगों की कमाई और बचत घट रही है, जबकि कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।
📉 कंपनियां अब सस्ते सामानों की बजाय प्रीमियम प्रॉडक्ट्स पर ध्यान दे रही हैं, क्योंकि खर्च करने वाले लोगों की संख्या सीमित है।
📉 उदाहरण के तौर पर, 5 साल पहले रियल एस्टेट बाजार में अफोर्डेबल हाउसिंग (सस्ते घर) की हिस्सेदारी 40% थी, जो अब घटकर सिर्फ 18% रह गई है।
📉 इसके उलट, महंगे घर और लग्जरी प्रॉडक्ट्स की बिक्री बढ़ी है, क्योंकि सिर्फ अमीर लोग ही खर्च कर रहे हैं।
भारत की खपत चीन से 13 साल पीछे!
💰 2023 में भारत में प्रति व्यक्ति खर्च 1,493 डॉलर था, जबकि चीन में 2010 में ही यह 1,597 डॉलर तक पहुंच गया था।
💰 सरकार ने मिडिल क्लास को टैक्स में छूट दी है, जिससे 12 लाख रुपये तक कमाने वालों को इनकम टैक्स नहीं देना होगा। इससे 92% सैलरीड लोगों को राहत मिली है, लेकिन फिर भी खर्च करने की प्रवृत्ति नहीं बढ़ी है।
💰 लोग अब सामान खरीदने की बजाय अनुभवों (experiences) पर खर्च कर रहे हैं। कोल्डप्ले और एड शीरन के कॉन्सर्ट पूरी तरह बिक गए, जिससे पता चलता है कि लोग अब मनोरंजन और अनुभवों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बढ़ता कर्ज का बोझ!
📊 दिसंबर 2024 तक माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का NPA (नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स) 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
📊 NPA यानी वह लोन जो लोग वापस नहीं कर पा रहे हैं।
📊 गरीब लोग माइक्रोफाइनेंस से छोटे-छोटे लोन लेते हैं, क्योंकि बैंकों से उन्हें आसानी से लोन नहीं मिलता। लेकिन अब उनकी कर्ज चुकाने की ताकत घट गई है।
📊 91 से 180 दिन का बकाया लोन 3.3% और 180 दिन से ज्यादा बकाया लोन 9.7% तक पहुंच गया है।
📊 इस बढ़ते कर्ज के कारण माइक्रोफाइनेंस कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं, क्योंकि उन्हें NPA और बढ़ने का खतरा लग रहा है।
निष्कर्ष – भारत में अमीर-गरीब की खाई बढ़ रही है!
📌 अमीर और अमीर हो रहे हैं, लेकिन गरीबों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।
📌 खर्च करने वाला वर्ग बड़ा नहीं हो रहा, जिससे भारतीय बाजार में बदलाव आ रहा है।
📌 सरकार की नीतियों से मिडिल क्लास को राहत तो मिली है, लेकिन इससे भी खर्च करने की आदत में बड़ा बदलाव नहीं आया।
📌 खर्च और कर्ज के असंतुलन को ठीक किए बिना भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे ले जाना मुश्किल होगा।
👉 आप क्या सोचते हैं? क्या भारत में आम आदमी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए और कदम उठाए जाने चाहिए?