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भारत सरकार ने तुहिन कांत पांडेय को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। वे माधबी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल इस महीने समाप्त हो रहा है। माधबी पुरी बुच SEBI की पहली महिला अध्यक्ष थीं और उन्होंने 2 मार्च 2022 को यह पद संभाला था।
कौन हैं तुहिन कांत पांडेय?
तुहिन कांत पांडेय ओडिशा कैडर के 1987 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। हाल ही में, उन्हें वित्त और राजस्व सचिव बनाया गया था। इससे पहले, वे निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव के रूप में कार्यरत थे। DIPAM वह विभाग है जो सरकारी कंपनियों के विनिवेश (Disinvestment) और निजीकरण (Privatization) की प्रक्रिया को देखता है।
तुहिन कांत पांडेय ने कई बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाई है, जिनमें एयर इंडिया का निजीकरण और IDBI बैंक के विनिवेश जैसे फैसले शामिल हैं। उनका अनुभव उन्हें शेयर बाजार, वित्तीय नीति और निवेश के क्षेत्र में एक मजबूत नेता बनाता है।
किन-किन पदों पर रह चुके हैं तुहिन कांत पांडेय?
तुहिन कांत पांडेय ने भारत की आर्थिक नीतियों, सरकारी वित्त और निवेश प्रबंधन में कई अहम भूमिकाएँ निभाई हैं। वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:
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केंद्रीय बजट 2025-26 तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका
- उन्होंने मध्यम वर्ग के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की टैक्स छूट दिलाने में मदद की।
- नया आयकर विधेयक (Income Tax Bill) तैयार करने में योगदान दिया, जिससे 1961 के पुराने आयकर कानून को बदला जाएगा।
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DIPAM सचिव के रूप में ऐतिहासिक फैसले लिए
- वे DIPAM के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सचिवों में से एक रहे हैं।
- सरकारी कंपनियों के निजीकरण और विनिवेश में उनकी भूमिका अहम रही है।
- एयर इंडिया को टाटा समूह को बेचने की प्रक्रिया में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई।
- IDBI बैंक का निजीकरण शुरू किया, जो अभी जारी है।
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अन्य प्रमुख प्रशासनिक पद
- ओडिशा के संबलपुर जिले के कलेक्टर के रूप में सेवा की।
- वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव के रूप में कार्य किया।
- स्वास्थ्य, परिवहन और वाणिज्यिक कर विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभालीं।
SEBI चेयरमैन बनने के बाद क्या बोले तुहिन कांत पांडेय?
SEBI का चेयरमैन बनाए जाने के बाद तुहिन कांत पांडेय ने कहा,
“मुझे सरकार ने यह बड़ी जिम्मेदारी दी है। आदेश मिलने के बाद मैं जल्द ही पदभार ग्रहण करूंगा। फिलहाल मैं बाजार की स्थिरता के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन मेरा प्रयास रहेगा कि भारतीय शेयर बाजार को मजबूत और पारदर्शी बनाया जाए।”
शिक्षा और योग्यता
तुहिन कांत पांडेय ने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (Post-Graduation in Economics) किया है। इसके अलावा, उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय से MBA की डिग्री हासिल की है। वे भारतीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासन में गहरा अनुभव रखते हैं।
SEBI के नए चेयरमैन के रूप में उनकी चुनौतियाँ
SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) भारत के शेयर बाजार और निवेशकों की सुरक्षा का प्रमुख नियामक (Regulator) है। तुहिन कांत पांडेय को निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना होगा:
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शेयर बाजार में पारदर्शिता
- निवेशकों को ठगी और अनियमितताओं से बचाने के लिए कड़े नियम लागू करने होंगे।
- बाजार में फर्जी कंपनियों और हेरफेर करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।
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निजीकरण और निवेश बढ़ाना
- भारत में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति बनानी होगी।
- डिजिटल शेयर बाजार को और मजबूत बनाना होगा।
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क्रिप्टोकरेंसी और फिनटेक सेक्टर
- क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल फाइनेंस (Fintech) के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नए नियम बनाने होंगे।
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छोटे निवेशकों की सुरक्षा
- छोटे और मझोले निवेशकों को बाजार में सुरक्षित निवेश के लिए नई गाइडलाइंस लागू करनी होंगी।
तुहिन कांत पांडेय एक अनुभवी और कुशल प्रशासक हैं, जिनका वित्त और निवेश प्रबंधन में लंबा अनुभव है। उन्होंने सरकारी कंपनियों के निजीकरण, बजट निर्माण और आयकर सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में SEBI को नए नियमों, पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की उम्मीद है।