पंजाब की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बड़ा बयान देकर अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वह राजनीति को बदलाव का जरिया मानते हैं, ना कि कोई निजी लाभ का रास्ता।
“मैं बदलाव के लिए राजनीति में आया हूं”
सिद्धू ने कहा, “मैं राजनीति में धंधा करने नहीं, बल्कि बदलाव लाने आया हूं।” उन्होंने पंजाब में पिछले कई दशकों की सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य को लंबे समय से माफिया चला रहा है। उनका दावा है कि उन्होंने कभी समझौता नहीं किया और अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटे।
“ऊंची आवाज में बोलता हूं, तो आरोप लगते हैं”
सिद्धू ने कहा कि उन पर सिर्फ इसलिए आरोप लगाए जाते हैं क्योंकि वह बेबाकी से अपनी बात रखते हैं। उन्होंने कहा, “अगर मैं ऊंची आवाज में सच्चाई बोलता हूं, तो उसे भी गलत समझा जाता है।” सिद्धू ने यह भी कहा कि उनके 15 साल के राजनीतिक करियर में उन पर कोई भ्रष्टाचार या अनैतिकता का आरोप नहीं लगा है।
कांग्रेस से दूरी और नाराजगी
हाल ही में कांग्रेस ने लुधियाना वेस्ट उपचुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की थी। इस सूची में पंजाब कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल थे, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू का नाम नहीं था। इसके बाद से चर्चा और तेज हो गई कि सिद्धू कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से सिद्धू पार्टी की गतिविधियों में ज्यादा सक्रिय नहीं दिखे हैं। हालांकि, वह सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ अपनी नजदीकी दिखाते रहे हैं।
कांग्रेस से लंबा सफर, लेकिन उठा-पटक भी
सिद्धू ने साल 2016 में बीजेपी छोड़ दी थी और 2017 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उन्हें पार्टी ने बड़ा पद देते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष भी बनाया, लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद से उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कभी पार्टी से नाराजगी, कभी समर्थन—सिद्धू की राजनीति ने कांग्रेस के लिए कई बार मुश्किलें खड़ी की हैं।
अब आगे क्या?
हालांकि सिद्धू ने कांग्रेस छोड़ी नहीं है, लेकिन वह पार्टी से कितने जुड़े हुए हैं, यह स्पष्ट नहीं है। उनका रुख कभी आक्रामक होता है, तो कभी शांत। लेकिन एक बात साफ है—नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति में सिर्फ चुप बैठने वालों में से नहीं हैं।
अब देखना होगा कि वह आगे पार्टी के साथ कितनी सक्रियता से जुड़ते हैं या कोई नया राजनीतिक मोड़ लेते हैं।
