भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला, 39 वर्षीय भारतीय अंतरिक्ष यात्री, अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंच गए हैं। वह ऐसा करने वाले भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत यूनियन के मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा की थी।
कैसे पहुंचे अंतरिक्ष स्टेशन?
शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य यात्रियों को लेकर स्पेसएक्स का ड्रैगन यान रवाना हुआ था। यह मिशन Axiom Mission-4 के तहत हुआ, जिसे अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा और निजी कंपनी स्पेसएक्स ने मिलकर भेजा। यह यान भारतीय समय अनुसार शाम 4:01 बजे उत्तरी अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुजरते समय ISS से जुड़ा। 4:15 बजे डाकिंग प्रक्रिया पूरी हुई, यानी यान पूरी तरह स्टेशन से जुड़ गया।
मिशन के साथी
शुभांशु शुक्ला इस मिशन में पायलट की भूमिका निभा रहे हैं। मिशन की कमान अनुभवी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन के हाथों में है। इसके अलावा दो अन्य यात्री भी इस मिशन का हिस्सा हैं:
-
टिबोर कपो – हंगरी के इंजीनियर, जो अपने देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं।
-
स्लावोज उज्नांस्की-विश्वनेवस्की – पोलैंड के इंजीनियर और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के सदस्य।
शुभांशु का भावुक संदेश
ISS पर पहुंचने के बाद शुभांशु शुक्ला ने हिंदी में एक खास वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “मैं यहां अपने देशवासियों की दुआओं की बदौलत पहुंचा हूं। यह सफर जितना आसान दिखता है, असल में उतना नहीं है। कम गुरुत्वाकर्षण की वजह से सिर भारी लग रहा है और शरीर अभी पूरी तरह साथ नहीं दे रहा, लेकिन जल्द ही इसकी आदत हो जाएगी।”
उन्होंने बताया कि यह तो सिर्फ मिशन की शुरुआत है। वे अगले 14 दिन अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताएंगे, जहां वे कई वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। शुभांशु ने कहा कि वे बेहद उत्साहित हैं और उनके कंधे पर लगा तिरंगा उन्हें हर पल इस बात का अहसास करवा रहा है कि पूरा देश उनके साथ है।
भारत के लिए गर्व का क्षण
यह भारत के लिए इतिहास रचने वाला पल है। शुभांशु न केवल अंतरिक्ष में पहुंचे हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम और ऊंचा किया है। Axiom-4 मिशन पूरी तरह निजी क्षेत्र द्वारा संचालित किया गया है, जो अंतरिक्ष यात्रा के नए दौर की शुरुआत का प्रतीक है।
मिशन का उद्देश्य
इस मिशन के दौरान सभी यात्री मिलकर अंतरिक्ष में विभिन्न तरह के वैज्ञानिक परीक्षण, जैविक प्रयोग और तकनीकी परीक्षण करेंगे। इन प्रयोगों से भविष्य में लंबी अवधि की अंतरिक्ष यात्राओं की तैयारी में मदद मिलेगी।
शुभांशु शुक्ला ने अपने संदेश का अंत “जय हिंद, जय भारत” कहकर किया। उनके यह शब्द सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्री की भावनाएं नहीं, बल्कि हर भारतीय के गर्व की आवाज़ हैं। यह मिशन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरेगा कि भारतीय भी अब अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
