केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया की ज़िंदगी एक मेहनती लड़की की कहानी है, जो अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए विदेश गई, लेकिन अब यमन में फांसी की सजा का सामना कर रही है।
निमिषा बचपन से पढ़ाई में तेज़ थीं, लेकिन मां अकेली थीं और घर चलाने के लिए दूसरों के घरों में काम करती थीं। स्थानीय चर्च की मदद से निमिषा ने नर्सिंग का कोर्स पूरा किया, लेकिन केरल में नौकरी नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने यमन जाने का फैसला किया, जहां नर्सों की काफी मांग थी।
साल 2008 में 19 साल की उम्र में निमिषा यमन गईं और सना के एक सरकारी अस्पताल में उन्हें नर्स की नौकरी मिल गई। सब कुछ ठीक चल रहा था। फिर 2012 में उन्होंने भारत लौटकर टॉमी थॉमस से शादी की और दोनों यमन वापस चले गए। 2012 में उनकी एक बेटी हुई, लेकिन हालात कठिन होते गए। आर्थिक दिक्कतों के चलते थॉमस बेटी को लेकर भारत लौट आए।
इधर यमन में निमिषा ने अपने हालात सुधारने के लिए खुद का क्लिनिक खोलने का फैसला किया, लेकिन वहां के कानून के अनुसार उन्हें किसी स्थानीय नागरिक को पार्टनर बनाना पड़ा। उन्होंने महदी नामक एक व्यक्ति को पार्टनर बनाया, जिससे उनकी जान-पहचान पहले से थी।
लेकिन यहीं से मुसीबतें शुरू हुईं। महदी ने धोखे से क्लिनिक की मिल्कियत अपने नाम कर ली और दावा किया कि वह निमिषा का पति है। उसने निमिषा का पासपोर्ट रख लिया, उसे प्रताड़ित किया और उसकी कमाई पर कब्ज़ा जमा लिया। परेशान होकर निमिषा ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन उल्टा उन्हीं को गिरफ्तार कर लिया गया।
2017 में, खुद को छुड़ाने के लिए निमिषा ने महदी को बेहोश करने की कोशिश की ताकि वह पासपोर्ट लेकर देश छोड़ सकें। लेकिन दवा की ज़्यादा मात्रा से महदी की मौत हो गई। आरोप है कि निमिषा ने शव के टुकड़े करके उसे टैंक में छुपा दिया। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
2020 में यमन की अदालत ने निमिषा को मौत की सजा सुना दी। परिवार ने अपील की लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। अब 16 जुलाई 2025 को उन्हें फांसी दी जानी है।
निमिषा को बचाने के लिए “Save Nimisha Priya” नाम से मुहिम चलाई जा रही है और ब्लड मनी के ज़रिए मामला सुलझाने की कोशिश जारी है। परिवार अब भी उम्मीद में है कि आखिरी वक्त में कोई चमत्कार हो और मां-बेटी फिर से मिल सकें।
