हाल ही में अहमदाबाद में हुए दुखद विमान हादसे को लेकर अब एयरलाइन पायलट एसोसिएशन (ALPA) का बयान सामने आया है। एसोसिएशन ने शुरूआती जांच रिपोर्ट में पायलटों को जिम्मेदार ठहराए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। ALPA का साफ कहना है कि अभी तक की जांच में यह साबित नहीं हुआ है कि इस हादसे के लिए पायलट दोषी थे। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बिना साक्ष्य के पायलटों को दोषी ठहराना गलत: ALPA
ALPA ने अपने आधिकारिक बयान में साफ तौर पर कहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में जिन बातों का जिक्र किया गया है, वे पायलटों की गलती को पूरी तरह साबित नहीं करतीं। खासतौर पर रिपोर्ट में बताया गया कि विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच को ‘रन’ से ‘कटऑफ’ में बदला गया था, जिससे इंजन बंद हुआ और हादसा हुआ। लेकिन ALPA का मानना है कि ऐसे तकनीकी पहलुओं पर बिना गहराई से जांच किए, किसी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।
पारदर्शी और विस्तृत जांच की मांग
ALPA ने इस घटना को लेकर निष्पक्ष और गहराई से जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि पायलटों को बिना पुख्ता सबूत के दोषी ठहराना न केवल गलत है, बल्कि इससे भविष्य की जांचों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने यह दोहराया कि उड्डयन एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें तकनीकी खराबी, संचार की गड़बड़ियां या अन्य कारक भी हादसों का कारण बन सकते हैं।
एसोसिएशन ने क्यों जताई चिंता?
ALPA का यह रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि वे देशभर के पायलटों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके लिए यह जरूरी है कि किसी भी जांच में पायलटों के अधिकारों की रक्षा हो। एसोसिएशन ने कहा कि वे हादसे की पूरी सच्चाई सामने लाना चाहते हैं, लेकिन बिना सबूत पायलटों पर उंगली उठाना अनुचित है। इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि पायलटों में हादसे को लेकर चिंता और असुरक्षा का माहौल है।
अब आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर हैं कि नागरिक उड्डयन विभाग और जांच एजेंसियां ALPA की बातों को कितना महत्व देती हैं। क्या जांच में और गहराई से काम होगा? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नई सुरक्षा नीतियां बनेंगी?
यह मामला केवल एक हादसे की जांच का नहीं, बल्कि उड़ान सुरक्षा और जिम्मेदारी की पारदर्शिता का भी है, जिसमें किसी भी तरह की जल्दबाज़ी सभी के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
