गुरुओं की नगरी अमृतसर को भिखारी मुक्त बनाने के लिए ज़िला प्रशासन ने कमर कस ली है। शहर के मुख्य चौकों और धार्मिक स्थलों पर भीख मांग रहे बच्चों और महिलाओं के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जा रही है। इस मुहिम के तहत डीसीपीओ दफ़्तर की टीम ने श्री हरिमंदिर साहिब के आसपास छापेमारी कर एक महिला को छह बच्चों के साथ गिरफ्तार किया है, जो भीख मंगवा रही थी।
बच्चों को भेजा गया पिंगलवाड़ा, महिला को विशेष केंद्र में रखा गया
इन मासूम बच्चों को प्रशासन ने पिंगलवाड़ा संस्थान में भेज दिया है, जहां उनकी देखरेख की जाएगी। वहीं उनकी कथित माँ, जो इस गिरोह की सरगना मानी जा रही है, उसे एक अलग संरक्षण केंद्र में रखा गया है। प्रशासन अब इन बच्चों के दस्तावेज़ों की गहन जांच के साथ-साथ डीएनए टेस्ट भी करवाएगा, जिससे यह पुष्टि की जा सके कि महिला वाकई उनकी माँ है या किसी गिरोह की सदस्य।
सख़्त सरकारी निर्देश, दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई
ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी तरणजीत सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार ने महानगरों को भिखारी मुक्त बनाने और बच्चों से जबरन भीख मंगवाने वालों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले भी गोल्डन गेट के पास एक महिला को कुछ बच्चों के साथ भीख मंगवाते हुए गिरफ्तार किया गया था। इन सभी मामलों की जांच अब गहराई से की जा रही है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
यह कोई पहला मामला नहीं है। 4 जुलाई को रंजीत एवेन्यू इलाके से एक महिला ‘निर्मला’ को भी गिरफ्तार किया गया था, जो बच्चों से जबरन भीख मंगवाती थी। वह मामला पंजाब में इस तरह की संगठित भिक्षावृत्ति का पहला उदाहरण था, जिस पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया।
डीसी साक्षी साहनी के निर्देश पर सभी विभाग सक्रिय
अमृतसर की डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों में त्वरित और सख़्त कार्रवाई करें। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की यह पहल अमृतसर को न सिर्फ़ भिखारी मुक्त बनाएगी, बल्कि मासूम बच्चों को गिरोहों की कैद से आज़ादी भी दिलाएगी। अब देखना होगा कि यह मुहिम कितनी गहराई तक जाती है और किस हद तक समाज में बदलाव ला पाती है।
