पंजाब के ब्यास गांव में आज एक युग का अंत हुआ, जब 114 वर्षीय विश्वप्रसिद्ध धावक फौजा सिंह का सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। यह अवसर केवल एक विदाई नहीं था, बल्कि उनके योगदान को सलाम करने का पल भी था।
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
फौजा सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत, और कई अन्य राजनेता उपस्थित हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा:
“फौजा सिंह जैसे महापुरुष विरले ही होते हैं। उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। आज की उनकी अंतिम यात्रा इस बात का प्रमाण है कि वे जन-जन के चहेते थे।”
स्कूल और स्टेडियम का नाम होगा फौजा सिंह के नाम पर
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर ऐलान किया कि फौजा सिंह के पैतृक गांव के स्कूल का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। साथ ही गांव के स्टेडियम में उनका प्रतिमा स्थापित की जाएगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां उन्हें हमेशा याद रखें और प्रेरणा लेती रहें।
नशों के खिलाफ था उनका कड़ा संदेश
भगवंत मान ने याद करते हुए बताया कि नशा मुक्ति अभियान के दौरान फौजा सिंह ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और युवाओं को स्वच्छ जीवन जीने का संदेश दिया।
“वो हमेशा कहते थे, अगर शरीर से प्रेम करोगे तो उम्र कभी बाधा नहीं बनेगी।”
सड़क हादसे में हुआ निधन, आरोपी एनआरआई गिरफ्तार
गौरतलब है कि फौजा सिंह का निधन एक सड़क दुर्घटना में हुआ। जब वे अपने घर के पास पैदल चल रहे थे, तब एनआरआई अमृतपाल सिंह ढिल्लों की तेज़ रफ्तार फॉर्च्यूनर कार ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल फौजा सिंह की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।
जालंधर ग्रामीण पुलिस ने 30 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसकी गाड़ी भी जब्त कर ली। अदालत में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
फौजा सिंह: एक प्रेरणा, एक युग
114 वर्षों तक सक्रिय जीवन जीने वाले फौजा सिंह ने यह साबित किया कि उम्र केवल एक संख्या है। वे न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए।
उनकी अंतिम विदाई एक युग के अंत की गवाही थी, लेकिन उनकी कहानी अमर रहेगी।
