केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में सुनाई गई फांसी की सजा पर सोमवार को नई जानकारी सामने आई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि निमिषा की सजा को रद्द कर दिया गया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने इन खबरों को गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि फांसी की सजा अब भी बरकरार है। मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में जो खबरें चल रही हैं, वे भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप, 2015 से यमन में काम कर रही थी निमिषा
निमिषा प्रिया, केरल की रहने वाली एक नर्स हैं जो 2015 में काम के सिलसिले में यमन गई थीं। वहां उन्होंने एक मेडिकल क्लिनिक शुरू किया और स्थानीय नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ बिजनेस पार्टनरशिप की। बाद में तलाल की हत्या में निमिषा को दोषी ठहराया गया, जिसके चलते यमन की अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी।
16 जुलाई को होनी थी फांसी, भारत सरकार की अपील पर टली
निमिषा की फांसी 16 जुलाई 2025 को तय थी, लेकिन भारत सरकार, केरल के धार्मिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप के बाद इसे फिलहाल टाल दिया गया। ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया कंथापुरम अबूबकर मुसलियार ने यमन के सूफी धर्मगुरु शेख उमर बिन हफीज से अनुरोध किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। शेख उमर ने मृतक तलाल के परिवार से बातचीत की, जिसके बाद फांसी की तारीख को आगे बढ़ाया गया।
क्या ब्लड मनी के जरिए माफी संभव है?
यमन में शरिया कानून लागू है और वहां ‘ब्लड मनी’ यानी ‘दिया’ की व्यवस्था है। इस कानून के तहत हत्या के मामलों में मृतक के परिवार की सहमति से पैसे के बदले दोषी को माफ किया जा सकता है। ऐसे में यह संभावना बनी हुई है कि अगर निमिषा प्रिया तलाल के परिवार को मना पाने में सफल होती हैं, तो उन्हें माफी मिल सकती है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अभी नहीं मिली राहत, प्रयास जारी
निमिषा प्रिया की फांसी की सजा फिलहाल रद्द नहीं हुई है, लेकिन भारतीय प्रशासन, धार्मिक संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता उनके लिए राहत पाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। मामले पर विदेश मंत्रालय की नजर बनी हुई है।
