आम आदमी पार्टी के संगरूर से लोकसभा सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने संसद में आज एक ऐसा मुद्दा उठाया, जो सीधे देश की आम जनता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने शून्य काल के दौरान दवाइयों की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जाहिर की और केंद्र सरकार से अपील की कि एक समान रासायनिक संरचना वाली दवाओं की अधिकतम कीमत तय की जाए।
दवाओं की कीमतों में भारी अंतर
मीत हेयर ने बताया कि देश में उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और शुगर (डायबिटीज) जैसी बीमारियां आम हो चुकी हैं और लाखों लोग रोज़ इनका इलाज करवाते हैं। इन बीमारियों में दी जाने वाली दवाएं कई कंपनियां बनाती हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक ही तरह की दवा, जिसमें एक जैसे रासायनिक तत्व (chemical composition) होते हैं, अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग कीमतों में बेच रही हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक दवा जिसकी लागत सिर्फ 3 रुपये है, कोई कंपनी उसे 10 रुपये में बेचती है, तो कोई 50 रुपये में। यही वजह है कि आम आदमी को इलाज कराना महंगा पड़ रहा है, और कंपनियां 300 से 1000 रुपये तक का मुनाफा कमा रही हैं।
ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) का जिक्र
मीत हेयर ने संसद में कहा कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत कुछ जरूरी दवाओं की कीमतें तय की गई हैं, लेकिन ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी आम बीमारियों की दवाओं पर कोई मूल्य नियंत्रण नहीं है। यह एक बड़ी खामी है, जिससे लाखों मरीज प्रभावित हो रहे हैं।
आम जनता के हक में उठी आवाज
मीत हेयर ने सरकार से मांग की कि एक जैसे रसायनिक घटकों वाली दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) तय की जाए, ताकि कोई कंपनी मनमानी न कर सके। इससे न सिर्फ मरीजों का खर्च कम होगा, बल्कि दवा कंपनियों की गैरजरूरी कमाई पर भी रोक लगेगी।
उन्होंने कहा, “यह पूरे देश की समस्या है। हम सब किसी न किसी रूप में इन बीमारियों से जुड़े हैं। इलाज को सस्ता बनाना समय की जरूरत है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत तभी मिलेगी जब दवाओं के दाम पर सरकार नियंत्रण लगाएगी।”
राजनीतिक दलों से भी सहयोग की अपील
मीत हेयर ने अन्य सांसदों और राजनीतिक दलों से भी अपील की कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट हों, ताकि दवाओं की कीमतें आम लोगों की पहुंच में रहें।
गुरमीत सिंह मीत हेयर की यह मांग देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। अगर सरकार इस ओर ध्यान देती है और दवाओं की कीमतों पर सीमा तय करती है, तो यह करोड़ों मरीजों को सीधी राहत देने वाला फैसला होगा।
