प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के सामाजिक व बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े पाँच अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। इस बैठक में कुल 52,667 करोड़ रुपये की योजनाओं को हरी झंडी दी गई। इन फैसलों में एलपीजी सब्सिडी, शिक्षा, पूर्वोत्तर राज्यों का विकास और सड़क निर्माण शामिल हैं।
उज्ज्वला योजना को मिलेगी और ताकत
सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को मजबूती देने के लिए 12,060 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि का इस्तेमाल नए एलपीजी कनेक्शन देने और गरीब परिवारों को रसोई गैस की सुविधा आसान बनाने के लिए किया जाएगा। योजना का लक्ष्य है कि हर घर में स्वच्छ ईंधन पहुंचे।
घरेलू गैस को सस्ता बनाए रखने के लिए 30,000 करोड़
महंगाई के दबाव को देखते हुए सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 30,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह सहायता राशि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियों को उनके घाटे की भरपाई के लिए दी जाएगी।
शिक्षा क्षेत्र को मिलेगा नया बूस्ट
तकनीकी शिक्षा संस्थानों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 4,200 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस राशि का उपयोग नए उपकरण, डिजिटल क्लासरूम और प्रयोगशालाओं के निर्माण में किया जाएगा, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष विकास पैकेज
पूर्वोत्तर भारत की प्रगति पर ध्यान केंद्रित करते हुए असम और त्रिपुरा के लिए 4,250 करोड़ रुपये का विशेष विकास पैकेज घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य इन राज्यों में आधारभूत ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देना है।
दक्षिण भारत में सड़क संपर्क को मिलेगा लाभ
दक्षिण भारत के लिए भी बड़ी घोषणा की गई है। पुडुचेरी से माकरनम तक फोर-लेन हाइवे बनाने के लिए 2,157 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सड़क संपर्क सुधारने और क्षेत्रीय विकास को गति देने में सहायक सिद्ध होगा।
सरकार का फोकस – समावेशी और संतुलित विकास
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह कदम देश के गरीब तबकों को राहत देने, शिक्षा को मजबूती देने और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। इन फैसलों से लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
