हिमाचल प्रदेश से छोड़े गए पानी के कारण ब्यास नदी का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र आधा फुट नीचे रह गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ब्यास नदी के किनारे स्थित दो निचले गांव—शेर बाघा और शेरनिगाह—में प्रशासनिक टीमें तैनात कर दी हैं। ये टीमें 24 घंटे जलस्तर पर नजर रखेंगी।
सबसे अधिक खतरे में दो गांव
जानकारी के अनुसार, ये दोनों गांव सीधे ब्यास नदी से जुड़े हैं और निचले इलाकों में होने के कारण यहां बाढ़ का खतरा सबसे अधिक है। पिछले वर्ष भी इन इलाकों में खतरे की स्थिति बनी थी, लेकिन तब पानी कपूर्थला के निचले हिस्सों की ओर चला गया था। उस समय तरनतारन जिले के निचले क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ था, खासकर धान की फसल को।
फिर बाढ़ के साये में ब्यास नदी
इस समय ब्यास नदी फिर से बाढ़ के खतरे में है और प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। एसडीएम बाबा बकाला ने फिलहाल किसी नुकसान की रिपोर्ट डीसी को भेज दी है।
डीसी ने दिए सतर्क रहने के निर्देश
जिला मजिस्ट्रेट और डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने बताया कि दोनों गांवों में तैनात टीमें दिन-रात जलस्तर की निगरानी कर रही हैं। सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। साथ ही गांवों के सरपंचों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रशासन द्वारा स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष से नियमित संपर्क में रहें।
रावी नदी में अभी स्थिति सामान्य
जम्मू-कश्मीर की ऊपरी नदियों से आने वाला पानी अक्सर रावी नदी में खतरनाक हालात पैदा कर देता है, लेकिन फिलहाल रावी नदी की स्थिति सामान्य है। रावी नदी में से हजारों लीटर पानी पहले ही बह चुका है। प्रशासन ने संवेदनशील धुसी बांधों की मरम्मत पहले ही कर दी थी, जिससे खतरा टल गया है।
निगरानी और बचाव तैयारियां जारी
प्रशासन का कहना है कि ब्यास नदी के जलस्तर में और वृद्धि होने पर तुरंत बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव दल, नावें और अन्य आवश्यक संसाधन पहले से तैयार रखे गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
