पोंग डैम में पिछले 24 घंटों के दौरान पानी की आमद तेज़ी से बढ़ी है। लगातार बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए डैम प्रबंधन को ब्यास नदी में करीब 57,087 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ा।
डैम में पानी की आमद और जलस्तर
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम 7 बजे पोंग डैम झील में पानी की आमद 83,371 क्यूसेक दर्ज की गई, जबकि जलस्तर 1377.17 फीट पहुंच गया। डैम से 18,849 क्यूसेक पानी टरबाइन के जरिए और 39,238 क्यूसेक पानी स्पिलवे गेट खोलकर छोड़ा गया। इस तरह कुल 57,087 क्यूसेक पानी शाह बैराज नहर में भेजा गया।
पानी का वितरण
शाह बैराज नहर से 45,362 क्यूसेक पानी ब्यास नदी में और 11,500 क्यूसेक पानी मुकैरियां हाइडल नहर में छोड़ा जा रहा है। अचानक आई इस भारी मात्रा में पानी की वजह से ब्यास नदी के किनारे बसे गांवों के किसानों की गन्ना और धान की फसल में पानी भर गया है, जिससे फसल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है।
किसानों की चिंता
गांवों के किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भर जाने से फसलें लंबे समय तक खड़ी नहीं रह पाएंगी। अगर पानी जल्द नहीं निकला तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। कई जगह खेत पूरी तरह डूब चुके हैं, जिससे नुकसान तय माना जा रहा है।
प्रशासन की चेतावनी
जगबाणी की टीम ने जब ब्यास नदी का दौरा किया तो देखा कि प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और नदी के पास न जाने की चेतावनी जारी की है। नदी और नहर के किनारों पर पुलिस की तैनाती की गई है ताकि कोई भी व्यक्ति खतरनाक क्षेत्रों में न पहुंचे।
लोगों की लापरवाही
चेतावनी के बावजूद, कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर तेज़ बहाव में बहकर आ रही लकड़ियां पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग मुकैरियां हाइडल नहर और ब्यास नदी से लकड़ियां निकाल रहे हैं, जिससे उनके साथ हादसा होने का खतरा बना हुआ है।
पोंग डैम में पानी की लगातार बढ़ोतरी और ब्यास नदी में छोड़े गए पानी से आसपास के गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन रही है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि लोग नदी या नहर के पास न जाएं और सतर्क रहें। किसानों के लिए यह समय मुश्किल भरा है, क्योंकि उनकी खड़ी फसलें डूबने के कगार पर हैं। अगर बारिश और पानी की आमद यूं ही जारी रही, तो नुकसान और बढ़ सकता है।
