पंजाब में शिक्षा क्षेत्र लंबे समय से सुधार की मांग कर रहा था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी और आज इसका असर जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी स्कूलों की हालत बदल रही है, छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पा रहे हैं और माता-पिता का विश्वास भी दोबारा लौट रहा है।
स्कूलों का कायापलट
सरकार ने सबसे पहले स्कूलों की मूलभूत ज़रूरतों पर ध्यान दिया। आज से कुछ साल पहले तक हजारों बच्चे बिना बेंच-कुर्सी के ज़मीन पर बैठकर पढ़ते थे, लेकिन अब हर सरकारी स्कूल में फर्नीचर उपलब्ध है। करीब 10,000 नए कक्षाओं का निर्माण हुआ है और 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी बनाई गई है ताकि बच्चों की सुरक्षा बनी रहे। साथ ही 118 “स्कूल ऑफ़ इमिनेंस” बनाए गए हैं, जहां स्मार्ट क्लास, हाई-स्पीड इंटरनेट और आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं।
शिक्षक और प्रशिक्षण
सिर्फ भवन बनाना ही काफी नहीं, शिक्षकों को भी बेहतर प्रशिक्षण देना ज़रूरी था। इसी सोच के साथ पंजाब सरकार ने सैकड़ों शिक्षकों और अधिकारियों को विदेशों और देश के नामी संस्थानों में प्रशिक्षण दिलवाया। कुछ शिक्षक फिनलैंड और सिंगापुर तक भेजे गए, वहीं कई हेडमास्टर और शिक्षा अधिकारियों को IIM अहमदाबाद से नेतृत्व और प्रबंधन की ट्रेनिंग दी गई। इस पहल ने अध्यापन की गुणवत्ता को नई दिशा दी है।
छात्रों की कामयाबी
सरकारी स्कूलों के छात्रों ने अब साबित कर दिया है कि वे किसी से कम नहीं। हाल ही में 44 बच्चों ने JEE (एडवांस) पास किया, वहीं सैकड़ों ने NEET और JEE मेन्स जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल की। इसके लिए सरकार ने “PACE” नाम से विशेष कोचिंग प्रोग्राम शुरू किया है। आने वाले समय में UPSC की तैयारी के लिए भी 8 नए कोचिंग सेंटर खोले जा रहे हैं।
नई पहलें और नवाचार
सरकार ने शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा। “IAS और IPS अफसरों को मेंटर” बनाकर स्कूलों से जोड़ा गया है, ताकि छात्रों को मार्गदर्शन मिल सके। नशे की रोकथाम के लिए कक्षा 9 से 12 तक नया पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे बच्चों को व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों की जानकारी मिले। बरनाला जिले में 8 आधुनिक लाइब्रेरी खोली गई हैं, ताकि युवाओं को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहूलियत मिले।
माता-पिता की भागीदारी
पहली बार राज्यभर के 20,000 स्कूलों में मेगा पीटीएम आयोजित की गई, जिसमें करीब 27 लाख माता-पिता शामिल हुए। इससे शिक्षा में पारदर्शिता आई और परिवार सीधे स्कूलों की प्रगति का हिस्सा बन गए।
नतीजे और भविष्य
इन सब प्रयासों का असर परीक्षा परिणामों और राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में साफ दिख रहा है। पंजाब के कई सरकारी स्कूलों ने 100 प्रतिशत पास प्रतिशत हासिल किया है और नेशनल अचीवमेंट सर्वे (NAS) 2024 में भी राज्य ने शानदार प्रदर्शन किया।
पंजाब में शिक्षा का चेहरा बदल रहा है। भगवंत मान सरकार के प्रयासों से सरकारी स्कूलों में भरोसा लौटा है, छात्र नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं और माता-पिता गर्व से अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेज रहे हैं। यह बदलाव न सिर्फ शिक्षा तक सीमित है, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को नई रोशनी दे रहा है।
