भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ओडिशा तट से देर रात देश की पहली इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) का सफल उड़ान परीक्षण किया गया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने बहुस्तरीय हवाई रक्षा क्षमता को और मजबूत कर लिया है।
देर रात हुआ ऐतिहासिक परीक्षण
शनिवार को रात लगभग 12:30 बजे ओडिशा तट से IADWS का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम भारत की सुरक्षा कवच को और सुदृढ़ करेगा और हवाई खतरों से देश की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
क्या है IADWS?
IADWS एक बहुस्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली है, जिसमें शामिल हैं:
-
सतह से हवा में मार करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया वाली मिसाइलें
-
बहुत कम दूरी की हवाई रक्षा प्रणाली (VSHORDS) मिसाइल
-
लेजर आधारित उच्च शक्ति वाली निर्देशित ऊर्जा हथियार प्रणाली (DEW)
यह प्रणाली दुश्मन के हवाई खतरों को रीयल-टाइम में नष्ट करने की क्षमता रखती है।
‘सुदर्शन चक्र’: भारत का उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम
IADWS के साथ भारत का एक और डिफेंस प्रोजेक्ट है ‘सुदर्शन चक्र’, जिसे 2026 तक तैनात करने की योजना है।
-
यह सिस्टम 2500 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर सकता है।
-
150 किलोमीटर की ऊंचाई तक हवा में किसी भी मिसाइल को इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है।
-
इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लेजर-गाइडेड सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
5 किमी/सेकंड की रफ्तार से मिसाइल दागेगा
‘सुदर्शन चक्र’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी गति है। यह 5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से मिसाइल दाग सकता है।
-
इसका ढांचा ग्राउंड-बेस्ड और स्पेस-बेस्ड हाइब्रिड मॉडल पर आधारित है।
-
इसमें सैटेलाइट और रडार नेटवर्क दोनों शामिल हैं।
-
यह दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियारों को बेअसर करने में सक्षम होगा।
सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट तय किया है।
हाल ही में सफल रही अग्नि-5 की टेस्टिंग
IADWS से पहले भारत ने इसी हफ्ते अपनी अत्याधुनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का भी सफल परीक्षण किया।
-
यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया।
-
मिसाइल ने सभी ऑपरेशनल और तकनीकी मानकों को पूरा किया।
-
इस सफलता से भारत की रणनीतिक क्षमता और रक्षा शक्ति में और बढ़ोतरी हुई है।
IADWS और ‘सुदर्शन चक्र’ जैसे प्रोजेक्ट्स भारत को रक्षा क्षेत्र में और आत्मनिर्भर बना रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में इन सिस्टम्स के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद भारत की हवाई रक्षा क्षमता दुनिया की अग्रणी शक्तियों में शामिल होगी।
