हरिके हेड वर्क्स में हाल ही में पानी का स्तर काफी बढ़ गया है। अधिकारियों के अनुसार, यहां पानी की मात्रा 2 लाख 59 हजार क्यूसेक दर्ज की गई है। इसी के साथ ही 2 लाख 45 हजार क्यूसेक पानी हुसेनीवाला की ओर डाऊन स्ट्रीम के लिए छोड़ा गया है, जबकि लगभग 13 हजार क्यूसेक पानी फीरोजपुर और राजस्थान फीडर के जरिए कृषि क्षेत्र को भेजा जा रहा है। पिछले दिन भी यहां 2 लाख 2 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
हरिके-पत्तण इलाके में पानी की निकासी को सुनिश्चित करने के लिए सभी 31 गेट खोल दिए गए हैं। इसके बावजूद, नदी के पास बसे कई गांवों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। खासकर हरिके-पत्तण के निचले इलाके—घड़ुम, कुत्तीवाला, सभरां, बस्ती लाल सिंह, डूमणी वाला, गदाईके, जलोके, कोटबुढ़ा, गड्डी बादशाह समेत कई अन्य गांव—इस बाढ़ की स्थिति से सीधे प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय प्रशासन और गृद्वारा साहिब के ग्रंथी सिंहों ने ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए अलर्ट और अनाउंसमेंट की व्यवस्था की है, ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके। ग्रामीणों को विशेष रूप से नदी किनारे जाने से और कमजोर क्षेत्रों में रहने से परहेज करने की सलाह दी जा रही है।
साल 2023 में भी हरिके में पानी का बहाव बढ़ने के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी, जब 2 लाख 85 हजार क्यूसेक पानी रिकॉर्ड किया गया था। इस अनुभव के कारण, इस बार भी बीआस नदी और हरिके हेड वर्क्स के आसपास बसे दर्जनों गांवों के लोग चिंतित हैं। खासकर किसान समुदाय की नींदें लगातार उड़ रही हैं, क्योंकि फसल और खेती को लेकर उन्हें लगातार जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि वे राहत और बचाव कार्यों में पूरी तत्परता के साथ जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने, पेयजल और जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
स्थानीय लोग भी प्रशासन की सतर्कता की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते अलर्ट जारी करने और गेट खोलने से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। वहीं, ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वे पानी के स्तर पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन से संपर्क करें।
