भारतीय रुपया शुक्रवार को इतिहास में पहली बार 88 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 87.73 पर खुला और दिनभर के कारोबार में यह 88.33 तक लुढ़का। अंततः यह 61 पैसे की भारी गिरावट के साथ 88.19 प्रति डॉलर के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। यह अब तक का सबसे निचला स्तर है।
अमेरिकी टैरिफ और विदेशी पूंजी निकासी का असर
फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, अमेरिका की ओर से भारत पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा, विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकासी और महीने के अंत में डॉलर की बढ़ती मांग, रुपये पर दबाव का बड़ा कारण बने। इसके साथ ही घरेलू शेयर बाजारों में कमजोर रुझान ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
88 के पार पहली बार
गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 87.58 पर बंद हुआ था। यह पहली बार है जब रुपया 88 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। इससे पहले 10 फरवरी 2025 को कारोबार के दौरान रुपया 87.95 तक पहुंचा था और 5 अगस्त 2025 को 87.88 पर बंद हुआ था।
विशेषज्ञों की राय: आगे और दबाव संभव
मीरा एसेट शेरखान के मुद्रा और कमोडिटी रिसर्च विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा,
“रुपया निकट भविष्य में नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार कर सकता है क्योंकि अमेरिका द्वारा भारत पर अतिरिक्त व्यापार ड्यूटी लगाए जाने से व्यापार घाटे की चिंता बढ़ी है। कमजोर घरेलू बाजार और एफआईआई की बिकवाली भी रुपये पर दबाव बढ़ाएगी।”
उन्होंने अनुमान जताया कि डॉलर-रुपया की स्पॉट रेंज 87.90 से 88.70 के बीच रह सकती है।
डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की चाल
डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को मापता है, 0.14% बढ़कर 97.94 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 0.76% टूटकर 68.10 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत के लिए राहत की बात है, लेकिन गिरता रुपया इसका फायदा कम कर रहा है।
घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी
घरेलू इक्विटी मार्केट में भी कमजोरी दर्ज हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 270.92 अंक गिरकर 79,809.65 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 74.05 अंक लुढ़ककर 24,426.85 अंक पर बंद हुआ। एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने गुरुवार को 3,856.51 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की।
अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच दबाव
रुपये पर यह दबाव ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर तनाव चरम पर है। अमेरिका ने भारत पर व्यापार ड्यूटी बढ़ाई है, जिससे भारत के निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है।
अमेरिकी बयान और भविष्य की उम्मीदें
अमेरिकी खजाना सचिव स्कॉट बेसेंट ने 28 अगस्त को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी दोहराई कि “भारत रूसी तेल से मुनाफा कमा रहा है।” हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि भारी टैरिफ लगाने के बावजूद भारत और अमेरिका अंततः किसी समझौते पर पहुंचेंगे।
