मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में दिन की शुरुआत मजबूती के साथ हुई थी, लेकिन कारोबार के आखिरी घंटों में बिकवाली का दबाव हावी रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 206.61 अंक टूटकर 80,157.88 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 45 अंकों की गिरावट के साथ 24,579.60 पर आकर ठहरा।
बैंकिंग और हेल्थकेयर शेयरों पर दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और हेल्थकेयर से जुड़े शेयरों में बिकवाली ने बाजार को नीचे खींचा। इसके अलावा, चुनिंदा आईटी और ऑटो सेक्टर की कंपनियों में भी दबाव देखा गया। दूसरी ओर, ऊर्जा और एफएमसीजी से जुड़े कुछ शेयरों ने सीमित बढ़त दर्ज की।
वैश्विक संकेतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से मिले मिले-जुले संकेतों का असर भारतीय बाज़ार पर साफ दिखा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। यही वजह रही कि शुरुआती रैली लंबे समय तक टिक नहीं सकी और बाजार फिसलकर लाल निशान पर बंद हुआ।
निफ्टी 50 का हाल
निफ्टी 50 इंडेक्स दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद 24,600 के स्तर से नीचे आ गया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह स्तर निवेशकों के लिए अहम माना जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में निफ्टी इस स्तर के ऊपर नहीं टिक पाया तो और गिरावट देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए सलाह
बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को शॉर्ट-टर्म ट्रेड से बचना चाहिए। दीर्घकालिक निवेशक चुनिंदा ब्लूचिप शेयरों और सुरक्षित सेक्टर पर ध्यान दें। इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर इंडेक्स पर भी नज़र रखना ज़रूरी है।
बाजार पर दबाव तो बना हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि घरेलू मांग और मजबूत कॉरपोरेट नतीजे आने वाले हफ्तों में सकारात्मक रुझान ला सकते हैं। फिलहाल, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 1-2 फीसदी के दायरे में उतार-चढ़ाव दिखा सकते हैं।
