इस महीने के आखिर में न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस बार भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
संयुक्त राष्ट्र महासभा का 80वाँ उच्च-स्तरीय सत्र 23 से 29 सितंबर तक न्यूयॉर्क में आयोजित होगा। इस दौरान पूरी दुनिया के शीर्ष नेता एक मंच पर आकर अपने विचार रखेंगे। परंपरा के अनुसार, सत्र की शुरुआत ब्राजील करेगा और उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बोलेंगे। इस बार की वक्ताओं की सूची में पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों का नाम था। साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नाम भी शामिल किया गया था।
भारत को महासभा में 27 सितंबर की सुबह संबोधन करना है। हालांकि, अब तय हो गया है कि पीएम मोदी की जगह डॉ. एस. जयशंकर यह भाषण देंगे।
भारत-अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमि
फिलहाल भारत और अमेरिका के रिश्तों में टैरिफ और तेल आयात को लेकर खिंचाव बढ़ गया है। कुछ समय पहले प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के दौरे पर गए थे और वहाँ राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात भी की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी।
लेकिन इसके बाद अचानक हालात बदल गए। ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। इसके बाद भारत पर कुल टैरिफ दर 50% तक पहुँच गई। भारत ने इस कदम को अनुचित बताते हुए कहा कि यह एकतरफा और बिना सोच-समझ के लिया गया फैसला है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को देखते हुए तेल आयात पर स्वतंत्र निर्णय लेता है। रूस से तेल खरीदना भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है और यह किसी भी तरह से अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं है।
क्यों अहम है यह सत्र?
संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह वार्षिक सत्र दुनिया का सबसे बड़ा कूटनीतिक मंच माना जाता है। इस साल का सत्र खास इसलिए है क्योंकि इसमें यूक्रेन-रूस युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष जैसे अहम मुद्दे छाए रहेंगे। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक संकट और विकासशील देशों की चुनौतियों पर भी चर्चा होगी।
भारत हर बार की तरह इस बार भी अपने विचार रखेगा, लेकिन प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में विदेश मंत्री जयशंकर पर ज़िम्मेदारी और बढ़ जाएगी। वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति और दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र हमेशा सुर्खियों में रहता है और इस बार भी सभी की नज़रें भारत पर टिकी होंगी। पीएम मोदी का इसमें शामिल न होना चर्चा का विषय जरूर है, लेकिन विदेश मंत्री जयशंकर के पास विदेश नीति का लंबा अनुभव है और उम्मीद है कि वे भारत की आवाज़ दुनिया तक प्रभावशाली तरीके से पहुँचाएँगे।
