पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन शुक्रवार को सीधे काम पर लौट आए। उन्होंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य में बाढ़ से प्रभावित इलाकों और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की।
झोने की खरीद 16 अक्टूबर से शुरू
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मान ने ऐलान किया कि धान की खरीद इस साल 16 अक्टूबर से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि किसान निश्चिंत रहें, सरकार उनकी फसलों की सही कीमत सुनिश्चित करेगी और कोई देरी नहीं होने दी जाएगी।
45 दिनों में मुआवज़ा देने का वादा
मान ने घोषणा की कि बाढ़ से प्रभावित हर किसान और परिवार को 45 दिनों के भीतर मुआवज़ा मिलेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां-जहां पानी घटा है, वहां तुरंत सर्वे कराकर रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने कहा कि नुकसान का आकलन पूरा होते ही चेक तैयार कर दिए जाएंगे और वे खुद अपने हाथों से पीड़ितों को सौंपेंगे।
किसानों को मिलेगा 20 हज़ार रुपये प्रति एकड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों की फसलें बाढ़ की चपेट में आई हैं, उन्हें प्रति एकड़ 20,000 रुपये मुआवज़ा दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद किसानों को एक हफ्ते का समय भी दिया जाएगा ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उनकी ज़मीन का सही सर्वे हुआ है या नहीं।
घर और संपत्ति के नुकसान पर भी राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल फसलों का ही नहीं, बल्कि जिनके घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें भी मुआवज़ा मिलेगा। साथ ही इस राशि को और बढ़ाने का निर्णय लिया गया है ताकि प्रभावित परिवारों को वास्तविक राहत पहुंच सके।
बेईमानी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
मान ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि इस “पुण्य के काम” में यदि किसी ने लापरवाही या बेईमानी की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, “जब तक हर प्रभावित व्यक्ति को मुआवज़ा नहीं मिलता, न मैं चैन से बैठूंगा और न किसी अधिकारी को बैठने दूंगा।”
लोगों की एकजुटता की सराहना
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने एक बार फिर पूरे देश को दिखा दिया कि यहां के लोग किसी भी आपदा से निपटने में पीछे नहीं हटते। उन्होंने समाजसेवी संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और कलाकारों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने आगे बढ़कर बाढ़ पीड़ितों की मदद की। मान ने कहा, “पंजाब की धरती की विशेषता है कि हम बाहर से आए लोगों को भूखा नहीं रहने देते, तो अपने ही लोगों को कैसे भूखा देख सकते हैं।”
राजनीति से दूरी बनाने का संदेश
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि लोगों की सेवा का है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसी भी विवाद में उलझने के बजाय राहत और पुनर्वास कार्यों पर पूरी ताकत से जुटी हुई है।
