पंजाब के ग़ुरदासपुर और पठानकोट ज़िलों के करीब साढ़े 400 गाँव हाल ही में आई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जहां हजारों लोगों की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो गई, वहीं पशुधन पर भी गहरा असर पड़ा है। अब तक इन इलाकों में लगभग 400 से ज्यादा पशुओं की मौत हो चुकी है और हजारों पशु बीमारियों से जूझ रहे हैं।
बढ़ते तापमान और हरे चारे की कमी बनी समस्या
पानी उतरने के बाद हालात और कठिन हो गए हैं। बढ़ते तापमान और हरे चारे की कमी ने मवेशियों को कई तरह की बीमारियों की चपेट में ला दिया है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ा है और करीब 20% की गिरावट दर्ज की गई है।
ग़ुरदासपुर में हज़ारों पशु संकट में
जिला ग़ुरदासपुर में ही लगभग 69 हज़ार पशु बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। अब तक 300 पशुओं और 28 हज़ार चूचों की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग की 42 टीमें लगातार गाँव-गाँव जाकर इलाज कर रही हैं। विभाग ने अब तक 7,800 से अधिक पशुओं का उपचार किया है और कई गाँवों में मुफ्त दवाइयाँ बाँटी जा रही हैं।
डेरा बाबा नानक में भी हालात गंभीर
डेरा बाबा नानक सब-डिवीजन के गाँवों में भी पशुधन पर असर दिख रहा है। यहां 27 से ज्यादा पशु प्रभावित हुए हैं। विभाग ने हर गाँव में कैम्प लगाकर टीकाकरण और इलाज शुरू कर दिया है ताकि पशुओं को बीमारियों से बचाया जा सके।
पठानकोट ज़िला भी नहीं बचा
पठानकोट के 90 से अधिक गाँव बाढ़ की चपेट में आए। इनमें से 42 गाँवों में नुकसान ज्यादा रहा। जिले में अब तक 100 से ज्यादा पशुओं और 5,000 पोल्ट्री की मौत हो चुकी है। यहां आठ विशेष टीमें सक्रिय हैं, जिन्होंने अब तक 5,400 पशुओं का इलाज किया है और टीकाकरण की प्रक्रिया जारी है।
मौसम बदलाव से बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई नमी और मौसम में बदलाव पशुओं के लिए खतरनाक है। खासतौर पर ‘गल घोटू’ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसलिए विभाग ने मुफ्त वैक्सीनेशन और दवाइयों की व्यवस्था की है। पहले प्रति पशु 5 रुपये की फीस ली जाती थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह माफ कर दिया गया है।
हरे चारे की कमी से नई चुनौतियाँ
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में हरा चारा पूरी तरह खराब हो चुका है। पशु अब सूखे चारे और साइलज पर निर्भर हैं। इसकी वजह से पाचन संबंधी बीमारियाँ, बुखार और खुर गलने की समस्या तेजी से सामने आ रही है। पशु तनाव में हैं, जिसके चलते दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
विशेषज्ञों की सलाह से ही होगा बचाव
पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को कई एहतियाती सुझाव दिए हैं। खुर गलने पर उन्हें लाल दवा और बीटाडीन के घोल से साफ करने की सलाह दी गई है। पशुओं को साफ जगह पर रखने और उन्हें ज़रूरत से ज्यादा साइलज न खिलाने की हिदायत दी गई है। इसके अलावा, अम्लीय तत्वों से बचाने के लिए प्रति पशु 60 ग्राम मीठा सोडा खिलाने की भी सलाह दी गई है।
प्रशासन की अपील
सरकार और विभाग की टीमें लगातार प्रभावित गाँवों में काम कर रही हैं। लोगों से अपील की गई है कि अगर कोई पशु बीमार दिखे तो तुरंत नज़दीकी पशु चिकित्सा अस्पताल से संपर्क करें।
