अमेरिका और यूरोप में प्रवासियों के विरोध की लहर अब ब्रिटेन तक पहुंच चुकी है। 13 सितंबर को राजधानी लंदन की सड़कों पर लगभग एक लाख लोग उतरे और अवैध अप्रवासियों को देश से बाहर निकालने की मांग की। ‘यूनाइट द किंगडम’ बैनर के तहत यह रैली संसद भवन के पास व्हाइटहॉल क्षेत्र में आयोजित हुई।
रैली का आयोजन और नारेबाज़ी
यह प्रदर्शन विवादित दक्षिणपंथी नेता टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में किया गया। भीड़ ब्रिटिश और यूरोपीय झंडों के साथ “हम अपना देश वापस चाहते हैं” और “फ्री स्पीच वापस चाहिए” जैसे नारे लगा रही थी। कई बैनरों पर “स्टॉप द बोट्स” और “सेंड देम आउट” लिखे गए थे।
टॉमी रॉबिन्सन की भूमिका
स्टीफन याक्सले-लेनन उर्फ टॉमी रॉबिन्सन इस रैली के मुख्य आयोजक थे। वह इंग्लिश डिफेंस लीग के संस्थापक रह चुके हैं और ब्रिटेन में राष्ट्रवादी चेहरा माने जाते हैं। रैली में उन्होंने कहा कि “यह ब्रिटेन में सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत है” और अवैध प्रवासियों को स्थानीय समुदाय से ज्यादा अधिकार दिए जाने को अन्याय बताया। मंच पर उनकी किताबें और घोषणापत्र भी बेचे गए।
एलॉन मस्क की चौंकाने वाली मौजूदगी
इस रैली में अमेरिकी अरबपति एलॉन मस्क ने वीडियो लिंक के जरिए हिस्सा लिया। उन्होंने ब्रिटिश संसद को भंग करने और सरकार बदलने की मांग तक कर डाली। मस्क ने कहा कि प्रवासन की लहर ब्रिटेन की पहचान को खतरे में डाल रही है और जनता को “या तो लड़ना होगा या खत्म होना होगा।” रैली में MAGA हैट पहने लोग भी दिखाई दिए, जिसे अमेरिका-यूके दक्षिणपंथी गठजोड़ का संकेत माना जा रहा है।
नस्लवाद विरोधी काउंटर-रैली
टॉमी रॉबिन्सन की रैली के जवाब में ‘स्टैंड अप टू रेसिज्म’ नामक संगठन ने लगभग 5,000 लोगों की काउंटर-रैली निकाली। इनके नारे थे – “शरणार्थियों का स्वागत है” और “फाइट बैक अगेंस्ट फासिज्म”। निर्दलीय सांसद डायने एबॉट ने कहा कि “नस्लवाद और हिंसा को हमेशा हराया गया है और इस बार भी हराना होगा।”
पुलिस की सख़्त निगरानी
मेट्रोपोलिटन पुलिस ने सुरक्षा के लिए 1,600 से अधिक अधिकारियों को तैनात किया था। ज्यादातर समय प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शाम को कुछ उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस पर बोतलें फेंकी। इसमें 26 पुलिसकर्मी घायल हुए और 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सामाजिक और राजनीतिक असर
यह रैली ब्रिटेन में प्रवासन को लेकर बढ़ते ध्रुवीकरण का बड़ा संकेत है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दक्षिणपंथी आंदोलनों और Reform UK जैसी पार्टियों की लोकप्रियता अब और बढ़ सकती है। यूरोप में पहले से ही एंटी-इमिग्रेशन लहर तेज़ है और ब्रिटेन में यह रुझान अब खुलकर सामने आ गया है।
यह साफ है कि लंदन की यह रैली सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि ब्रिटिश राजनीति में एक नई बहस की शुरुआत है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या ये सड़कें संसद तक अपना असर छोड़ पाएंगी।
