पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राज्य के सरकारी, एडेड, एफिलिएटेड और एसोसिएटेड स्कूलों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने घोषणा की है कि यदि सत्र 2025-26 के लिए छात्रों की ऑनलाइन एंट्री में कोई गलती रह गई है, तो स्कूल अब इन्हें सुधार सकते हैं।
किन कक्षाओं पर लागू होगा?
यह सुविधा 8वीं, 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं के छात्रों पर लागू होगी।
छात्रों के जिन विवरणों में सुधार किया जा सकता है, उनमें शामिल हैं:
- नाम
- पिता/माता का नाम
- जन्म तिथि
- रजिस्ट्रेशन नंबर
- फोटो और हस्ताक्षर
- विषय और स्ट्रीम
- आधार नंबर
- माध्यम (हिंदी, पंजाबी, अंग्रेज़ी आदि)
मुफ्त में सुधार का मौका
बोर्ड ने साफ़ किया है कि स्कूल 20 सितंबर से 30 सितंबर तक बिना किसी शुल्क के सुधार कर सकते हैं। इस अवधि में अगर छात्र के नाम, माता-पिता के नाम, या आधार नंबर जैसी सामान्य जानकारी में बदलाव करना है, तो स्कूल स्तर पर ही सुधार प्रोफार्मा जेनरेट करके बदलाव किए जा सकेंगे।
शुल्क के साथ संशोधन
अगर किसी वजह से स्कूल 30 सितंबर तक सुधार नहीं कर पाते, तो एक और मौका मिलेगा।
- 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक 200 रुपये प्रति सुधार शुल्क देना होगा।
- इस दौरान स्कूल को सुधार प्रोफार्मा और ज़रूरी दस्तावेज लेकर जिला क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर जानकारी को सत्यापित कराना होगा।
मुख्य कार्यालय में बड़े बदलाव
कुछ जानकारी जैसे –
- रजिस्ट्रेशन नंबर
- जन्म तिथि
- फोटो और हस्ताक्षर
- विषय और स्ट्रीम
इनमें बदलाव करने के लिए स्कूलों को सीधे पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के मुख्य कार्यालय जाना होगा।
- सुधार की अवधि: 20 सितंबर से 15 अक्टूबर तक
- शुल्क: 1000 रुपये प्रति सुधार
- आवश्यक दस्तावेज़ और सुधार प्रोफार्मा जमा करना अनिवार्य होगा।
जानकारी कहाँ मिलेगी?
बोर्ड ने बताया है कि सभी स्कूल अपनी लॉग-इन आईडी और बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से पूरा शेड्यूल, दिशा-निर्देश और सुधार प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
क्यों है यह फैसला अहम?
अक्सर ऑनलाइन एंट्री करते समय छात्रों के नाम, जन्म तिथि या फोटो जैसी जानकारियों में छोटी-छोटी गलतियाँ रह जाती हैं। आगे चलकर ये गलतियाँ बोर्ड परीक्षा, परिणाम या प्रमाणपत्रों में बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए बोर्ड ने समय रहते यह मौका देकर छात्रों और स्कूलों दोनों को राहत दी है।
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड का यह कदम छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब कोई भी स्कूल अपने छात्रों की जानकारी सही कर सकता है और आगे की परीक्षाओं या प्रमाणपत्रों में परेशानी से बच सकता है। यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता लाएगी बल्कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में भी मदद करेगी।
