अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में H-1B वीजा का शुल्क अचानक बढ़ाकर सभी को चौंका दिया। अब तक यह वीजा आईटी सेक्टर और मेडिकल क्षेत्र में बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जाता रहा है। 19 सितंबर को ट्रंप ने एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद घोषणा की गई कि 21 सितंबर या इसके बाद किए गए नए आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगेगा। यह शुल्क केवल एक बार देना होगा, इसे हर साल का शुल्क नहीं माना जाएगा।
इस कदम के बाद भारत के आईटी उद्योग में हड़कंप मच गया। दरअसल, H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय कंपनियां और प्रोफेशनल्स करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केवल भारत ही इस वीजा का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है। ऐसे में अचानक शुल्क बढ़ने से कंपनियों पर भारी बोझ पड़ सकता है।
डॉक्टरों को मिल सकती है राहत
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन डॉक्टरों को इस भारी शुल्क से छूट देने पर विचार कर रहा है। अमेरिका के बड़े अस्पताल और हेल्थ सिस्टम जैसे मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और सेंट जूड हॉस्पिटल H-1B वीजा पर काफी हद तक निर्भर हैं। उदाहरण के तौर पर, मेयो क्लिनिक के पास ही 300 से ज्यादा H-1B वीजा स्वीकृत हैं। अगर डॉक्टरों को छूट दी जाती है तो अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है।
डॉक्टरों की कमी का खतरा
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर वीजा शुल्क इतना ज्यादा कर दिया गया तो अमेरिका में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी और गंभीर हो जाएगी। मेडिकल रेजिडेंट्स और कई स्पेशलिस्ट डॉक्टर अमेरिका में H-1B वीजा के जरिए ही आते हैं। अगर शुल्क कम नहीं हुआ तो कई अस्पतालों को आवश्यक स्टाफ नहीं मिल पाएगा।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने भी इस बारे में कहा कि नया कानून संभावित छूट की अनुमति देता है। इसमें मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर शामिल हो सकते हैं। यानी डॉक्टरों को राहत देने का रास्ता खुला हुआ है।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर
यह फैसला भारत और अमेरिका के बीच संबंधों पर भी असर डाल सकता है। पहले ही दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार को लेकर तनातनी चल रही थी। अब वीजा शुल्क ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस मुद्दे का हल निकाला जा सकता है।
नतीजा क्या होगा?
अगर डॉक्टरों को छूट मिलती है तो अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी और भारत से जाने वाले डॉक्टरों के लिए रास्ता आसान होगा। लेकिन आईटी सेक्टर की कंपनियों के लिए यह शुल्क अब भी बड़ी चुनौती बना रहेगा। इस फैसले से साफ है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका में नौकरी के अवसरों को सुरक्षित रखने और विदेशी वीजा पर आने वालों की संख्या को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
H-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी ने भारत और अमेरिका दोनों देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि डॉक्टरों को छूट देने का फैसला होता है या नहीं।
