पंजाब के कपास किसानों की मुश्किलें एक बार फिर सामने आ गई हैं। राज्य के कृषि और किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्र सरकार से अपील की है कि कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) तुरंत मंडियों में कपास की खरीद शुरू करे। उन्होंने कहा कि इस साल सरकार ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,710 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन मंडियों में CCI की गैर-मौजूदगी से किसान मजबूरी में अपनी फसल निजी व्यापारियों को कम दामों पर बेच रहे हैं।
किसानों की बढ़ती चिंता
मंत्री खुड्डियां ने कहा कि कपास को ‘सफेद सोना’ कहा जाता है और इस बार अच्छी पैदावार के बावजूद किसान परेशान हैं। मंडियों में कपास की आमद बढ़ी है, लेकिन CCI के खरीदारों के न आने से किसान निराश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने एमएसपी पर फसल खरीदने का वादा किया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हो रहा।
पंजाब सरकार के प्रयास
मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार ने किसानों को कपास की खेती के लिए कई प्रोत्साहन दिए। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में किसानों को कपास के हाइब्रिड बीजों पर 33% सब्सिडी दी गई। इसके अलावा विविधता बढ़ाने के लिए अन्य योजनाएं भी लागू की गईं। इसका असर यह हुआ कि कपास की खेती का क्षेत्र 99,000 हेक्टेयर (2024) से बढ़कर इस साल 1.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यानी 20% की बढ़ोतरी हुई है।
किसानों की मजबूरी
मंत्री खुड्डियां ने कहा कि किसानों ने केंद्र सरकार पर भरोसा करके कपास बोई थी। उन्हें उम्मीद थी कि फसल की सही कीमत मिलेगी, लेकिन अब उन्हें निजी व्यापारियों को MSP से कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए नुकसानदायक है बल्कि उनके विश्वास को भी तोड़ रही है।
मंत्री का सीधा सवाल
कृषि मंत्री ने सवाल उठाया – “जब मंडियों में किसान अपनी फसल लेकर बैठे हैं, तो आखिर CCI कहाँ है? किसानों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिकेगी, लेकिन अब ऐसा क्यों हो रहा है?”
तुरंत समाधान की मांग
मंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह तुरंत कदम उठाए और CCI के माध्यम से बिना देरी के कपास की खरीद शुरू करवाए। उन्होंने कहा कि अगर थोड़ी-सी भी फसल MSP से नीचे बिकती है, तो इससे किसानों का भरोसा सरकार की नीतियों पर से उठ जाएगा।
पंजाब के कपास किसानों ने मेहनत और विश्वास के साथ फसल उगाई, लेकिन अब वे उचित दाम पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से मदद और योजनाओं के बावजूद, असली राहत तभी मिलेगी जब केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर CCI के जरिए खरीद की प्रक्रिया जल्द शुरू करवाएगी।
