केरल का प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर इन दिनों एक नई विवाद की वजह से सुर्खियों में है। मंदिर में सोने की परत चढ़े पैनलों की मरम्मत के दौरान सोने की चोरी के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा गई है।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन यूडीएफ ने देवस्वम बोर्ड मंत्री वी.एन. वासवन के इस्तीफे की मांग करते हुए केरल विधानसभा की कार्यवाही लगातार दूसरे दिन ठप कर दी। जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी नेता वी.डी. सतीसन के नेतृत्व में विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और तख्तियां लहराईं। विपक्ष का कहना है कि जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देते, वे सदन नहीं चलने देंगे।
क्या है पूरा मामला?
सबरीमला मंदिर के गर्भगृह के बाहर द्वारपालक की पत्थर की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ी तांबे की शीटें लगी हैं। इन्हीं शीटों को लेकर गड़बड़ी और सोने की चोरी के आरोप लगाए गए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने इन शीटों को मरम्मत के लिए हटाकर एक प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंप दिया था। जानकारी के अनुसार, साल 2019 में पहली बार ये शीटें मरम्मत के लिए हटाई गईं थीं। मरम्मत के बाद जब इन्हें वापस लाया गया, तो वजन में करीब 4.5 किलो की कमी पाई गई।
इसके बाद सितंबर 2025 में दोबारा मरम्मत के नाम पर पैनल हटाए गए, लेकिन इस बार उच्च न्यायालय से कोई अनुमति नहीं ली गई। जांच के दौरान पोट्टी की बहन के तिरुवनंतपुरम स्थित घर से दो पेडस्टल बरामद किए गए, जिससे शक और गहरा गया।
अदालत की सख्ती और जांच
मामला बढ़ने के बाद केरल उच्च न्यायालय ने इस पर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने पूरे मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया है। जांच के लिए एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) एच. वेंकटेश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया है। यह टीम त्रिशूर के केईपीए के सहायक निदेशक एस. शशिधरन, IPS की निगरानी में छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
बोर्ड की सफाई
देवस्वम बोर्ड ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी पैनल को उन्नीकृष्णन पोट्टी को नहीं सौंपा गया था। बोर्ड के मुताबिक, कुल 14 स्वर्ण-प्लेटेड पैनल थे जिनका वजन लगभग 38 किलो और सोना 397 ग्राम था। इनमें से 2 पैनल मंदिर में ही रखे गए, जबकि 12 पैनल चेन्नई की “स्मार्ट क्रिएशन्स” कंपनी को मरम्मत के लिए भेजे गए।
बोर्ड ने बताया कि मरम्मत के दौरान 10 ग्राम अतिरिक्त सोने का उपयोग किया गया और मरम्मत पूरी होने के बाद सभी पैनल अदालत के निर्देश पर मंदिर को लौटा दिए गए। जांच में अब इन पैनलों में कुल 407 ग्राम सोना पाया गया है, यानी पहले से ज्यादा।
वारंटी और विवाद
बोर्ड ने यह भी कहा कि 2019 में मरम्मत के समय “स्मार्ट क्रिएशन्स” और उन्नीकृष्णन पोट्टी ने 40 साल की वारंटी दी थी। इसलिए 2025 में भी मरम्मत के लिए उसी प्रायोजक से संपर्क किया गया। बोर्ड का दावा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक रंग दे दिया गया है और सोने की चोरी के आरोप पूरी तरह भ्रामक और झूठे हैं।
फिलहाल अदालत की जांच जारी है और विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा हुआ है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सबरीमला के इस “सोने के विवाद” का सच क्या निकलता है—क्या यह वाकई चोरी का मामला है या सिर्फ राजनीति की नई चाल?
