आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आखिरकार नया सरकारी बंगला मिल गया है। केंद्र सरकार ने उन्हें दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में टाइप-8 बंगला अलॉट किया है। यह वही बंगला श्रेणी है, जो देश में सबसे बड़े सरकारी आवासों में से एक मानी जाती है।
काफी समय से यह मामला चर्चा में था, क्योंकि केजरीवाल को बंगला अलॉट होने में करीब एक साल की देरी हुई थी। इस देरी को लेकर उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। आखिरकार अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि 10 दिन के भीतर बंगला दे दिया जाएगा, और अब यह वादा पूरा कर दिया गया है।
कहां है केजरीवाल का नया बंगला?
अरविंद केजरीवाल को अब जो बंगला मिला है, वह 95 लोधी एस्टेट, नई दिल्ली में स्थित है। यह इलाका दिल्ली के सबसे वीआईपी और सुरक्षित इलाकों में से एक माना जाता है, जहाँ कई केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल और वरिष्ठ राजनेता रहते हैं।
AAP का कहना है कि चूंकि पार्टी अब एक राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी है, इसलिए इसके राष्ट्रीय संयोजक को सरकारी आवास का पूरा अधिकार है। यही वजह है कि केजरीवाल को यह बंगला अब आधिकारिक रूप से अलॉट किया गया है।
हाई कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला
बंगला अलॉट करने में देरी को लेकर यूनियन हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय पर सवाल उठे थे। अरविंद केजरीवाल ने इसी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत में केंद्र सरकार ने 25 सितंबर को यह भरोसा दिलाया था कि 10 दिन के अंदर बंगला अलॉट कर दिया जाएगा।
इसके बाद 6 अक्टूबर (सोमवार) को मंत्रालय ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए 95 लोधी एस्टेट का टाइप-8 बंगला अरविंद केजरीवाल को सौंप दिया।
सबसे बड़े सरकारी बंगलों में से एक
टाइप-8 बंगला सरकारी आवासों की सबसे ऊंची श्रेणी में आता है। इस श्रेणी के बंगले आमतौर पर केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों या राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों को दिए जाते हैं। इसमें कई कमरे, बड़े हॉल, लॉन और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था होती है।
फिलहाल कहां रह रहे थे केजरीवाल?
मुख्यमंत्री पद से सितंबर 2024 में इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल ने 6, फ्लैगस्टाफ रोड वाला सरकारी आवास खाली कर दिया था। उस समय वे मुख्यमंत्री के तौर पर वहीं रहते थे। उसके बाद से वे अस्थायी रूप से AAP सांसद अशोक मित्तल को अलॉट किए गए बंगले में रह रहे थे।
केजरीवाल के वकील का तर्क
सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील ने अदालत में कहा कि साल 2014 के डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स के नियमों में यह स्पष्ट लिखा है कि राष्ट्रीय या मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को सरकारी आवास का अधिकार है। हालांकि, इसमें यह नहीं बताया गया कि कौन सा टाइप दिया जाएगा।
वकील ने अदालत को यह भी याद दिलाया कि अब तक सभी राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों — जैसे कांग्रेस, बीजेपी, बहुजन समाज पार्टी आदि — को हमेशा टाइप-8 बंगला ही मिला है। इसलिए अरविंद केजरीवाल को भी उसी श्रेणी का बंगला दिया जाना चाहिए।
अब राहत की सांस
लगभग एक साल की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद अब केजरीवाल को नया घर मिल गया है। पार्टी के समर्थक इसे “राजनीतिक न्याय” बता रहे हैं, वहीं विपक्ष का कहना है कि यह केवल “सरकारी सुविधा” है, कोई बड़ी जीत नहीं।
हालाँकि, इतना तय है कि अब अरविंद केजरीवाल का नया पता —
📍 95 लोधी एस्टेट, नई दिल्ली —
एक बार फिर से चर्चा में रहेगा।
