पहााड़ी इलाकों में फिर से हुई बारिश और मौसम में बदलाव के कारण पौंग डैम से छोड़े गए पानी के चलते ब्यास नदी का पानी बढ़ गया है। इससे स्थानीय किसानों की नींद उड़ गई है। शनिवार देर रात ब्यास नदी के अपस्ट्रीम में 81 हजार क्यूसेक पानी पहुंचा, जबकि डाउनस्ट्रीम के लिए 61 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
किसानों की मेहनत पानी में बह गई
कई दिनों तक पानी का स्तर कम रहने के कारण किसान अपनी पैदावार को उपजाऊ बनाने के लिए खेतों से बड़ी मशीनों की मदद से 5 से 8 फीट तक चढ़ी रेत निकाल रहे थे। लेकिन बीती रात पानी का बहाव तेज होने के कारण उनकी मेहनत बेकार हो गई। खेतों में लगी रेत और पानी फिर से खेतों में भर गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
मंडी क्षेत्र में स्थिति गंभीर
मंडी क्षेत्र के ब्यास नदी से लगे गांवों के लोग पहले ही बाढ़ के कारण परेशान थे। स्थानीय किसानों का कहना है कि हज़ारों एकड़ फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। पानी का स्तर अचानक बढ़ने से बीजाई का समय भी प्रभावित हुआ है। किसान अब अपने खेतों में गेहूं की बुआई करना मुश्किल समझ रहे हैं।
सरकार से बढ़ा हुआ मुआवजे का अनुरोध
किसानों का कहना है कि सरकार ने प्रति एकड़ 20 हजार रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा है, जो काफी कम है। उनका कहना है कि सही मुआवजा प्रति एकड़ 60 हजार रुपये होना चाहिए। किसानों ने जोर देकर कहा कि उनकी मेहनत और निवेश को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा दिया जाए।
कई दिन से चल रही तैयारियां बेकार
लोकल किसानों ने बताया कि पिछले करीब 15 दिन से वे खेतों में मशीनों की मदद से रेत निकालने का काम कर रहे थे। पानी के बढ़ जाने के कारण यह प्रयास फिर से करना पड़ेगा। इससे समय की कमी और फसल बुआई में देरी की संभावना है।
किसानों की चिंता और उम्मीद
किसानों का कहना है कि यदि पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो उनकी बुआई प्रभावित होगी और फसल पूरी तरह नष्ट होने का खतरा है। किसान सरकार से जल्द कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
