मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में फरवरी 2025 से शुरू हुआ “युद्ध नशे विरुद्ध” अब पंजाब में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस मुहिम का उद्देश्य सिर्फ तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि समाज को नशे की जकड़ से पूरी तरह मुक्त कर नई दिशा देना है। सरकार का मानना है कि नशा सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक बुराई है, जिसे खत्म करने के लिए जनता की भागीदारी जरूरी है।
238वें दिन की बड़ी कार्रवाई
अभियान के 238वें दिन, पंजाब पुलिस ने पूरे राज्य में 344 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान 90 नशा तस्कर गिरफ्तार किए गए और 78 एफआईआर दर्ज हुईं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 6.1 किलोग्राम हैरोइन, 696 नशे की गोलियां और कैप्सूल, तथा करीब ₹29,490 नकद ड्रग मनी बरामद की।
अब तक की कुल उपलब्धियाँ
इस अभियान के तहत अब तक 34,000 से अधिक नशा तस्कर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस लगातार गांवों और शहरों में जाकर नशा तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने में जुटी है। साथ ही सरकार नशा पीड़ितों के पुनर्वास और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि वे फिर से समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।
जनसहभागिता बनी अभियान की ताकत
पंजाब सरकार का यह प्रयास न केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित है, बल्कि इसे सामाजिक मुहिम के रूप में भी देखा जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मान ने कहा है — “हम पंजाब को नशा-मुक्त बनाकर आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देंगे।”
