रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। 66 वर्षीय उद्योगपति को 14 नवंबर को पेश होने का आदेश दिया गया है। इससे पहले अगस्त में भी उनसे पूछताछ की गई थी।
SBI से जुड़ा फर्जी बैंक गारंटी मामला
ED इस समय रिलायंस पावर से जुड़े एक फर्जी बैंक गारंटी रैकेट की जांच कर रही है। यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से संबंधित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस पावर को सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के एक टेंडर के दौरान बैंक गारंटी जमा करनी थी। इसके लिए कंपनी ने बिसवाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (BTPL) नामक ओडिशा की एक कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी थी।
लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि BTPL द्वारा दी गई बैंक गारंटी नकली थी। रिलायंस पावर ने इसके बदले कंपनी को करीब 5.4 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
फर्जी वेबसाइट और ईमेल से चला धोखाधड़ी का खेल
इस रैकेट को अंजाम देने के लिए एक नकली वेबसाइट (s-bi.co.in) बनाई गई, जो असली SBI वेबसाइट (sbi.co.in) की हूबहू नकल थी। दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए नकली ईमेल और डिजिटल सर्टिफिकेट भी इस्तेमाल किए गए।
ED ने इस मामले में BTPL के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ सारथी बिसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी सिर्फ कागजों पर मौजूद थी, उसका कोई वास्तविक दफ्तर नहीं था। कंपनी के कई बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए।
अन्य कंपनियों पर भी जांच की जद
जांच के दौरान यह भी पता चला कि अनिल अंबानी समूह की अन्य कंपनियां, जैसे रिलायंस NU BESS लिमिटेड और महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड, ने भी SECI को कुल 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटियां सौंपी थीं।
अब ED ने रिलायंस समूह से जुड़े पुराने वित्तीय मामलों की भी पुनः जांच शुरू की है, जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) पर ₹14,000 करोड़ के लोन फ्रॉड और केनरा बैंक के ₹1,050 करोड़ के धोखाधड़ी मामले शामिल हैं।
रिलायंस ग्रुप की पारदर्शिता पर सवाल
यह पूरा मामला सिर्फ एक फर्जी बैंक गारंटी घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिलायंस समूह की वित्तीय पारदर्शिता और प्रबंधन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाता है। ED की आगामी पूछताछ से यह स्पष्ट हो सकता है कि अनिल अंबानी की इस धोखाधड़ी में कितनी भूमिका थी और क्या उन्हें इसकी जानकारी पहले से थी।
