दुनिया तेज़ी से डिजिटल हो रही है और अब नकदी का दौर धीरे-धीरे पीछे छूटता जा रहा है। कई देश डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन स्वीडन ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडन दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने 100 प्रतिशत कैशलेस पेमेंट सिस्टम अपनाया है। यानी अब वहां कोई भी खरीदारी नकद में नहीं होती — हर भुगतान ऑनलाइन या कार्ड से किया जाता है।
अब कैश नहीं, सिर्फ डिजिटल ट्रांजेक्शन
स्वीडन की दुकानों और रेस्टोरेंट्स में अब “Cash Not Accepted” (नकद स्वीकार नहीं) के बोर्ड लगे दिख रहे हैं।
यहां तक कि छोटे बाजारों, कैफे और स्थानीय दुकानों ने भी डिजिटल पेमेंट को ही अपनाया है। इसका मतलब है कि अब देश में नकदी का चलन लगभग खत्म हो चुका है।
बुजुर्ग भी बने डिजिटल पेमेंट के साथी
अक्सर माना जाता है कि बुजुर्ग लोग नई तकनीक से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन स्वीडन ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।
यहां के सीनियर सिटिज़न्स भी अब मोबाइल पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वे किराना, दवाइयाँ, टैक्सी या रेस्टोरेंट — हर जगह QR कोड स्कैन करके पेमेंट कर रहे हैं।
यानी डिजिटल पेमेंट अब सिर्फ युवाओं का नहीं, बल्कि पूरे समाज का हिस्सा बन चुका है।
कैसे हुआ यह बड़ा बदलाव?
स्वीडन ने कैशलेस बनने की दिशा में कदम साल 2012 में ही बढ़ा दिए थे।
उसी साल देश के प्रमुख बैंकों ने मिलकर “Swish” नाम का मोबाइल पेमेंट ऐप लॉन्च किया था।
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इस ऐप की मदद से लोग केवल कुछ सेकंड में पैसे भेज या प्राप्त कर सकते हैं।
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आज स्वीडन की करीब 75% आबादी यानी लगभग 80 लाख लोग इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं।
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अब अधिकतर लेनदेन मोबाइल या कार्ड के माध्यम से ही होते हैं।
नकदी का इस्तेमाल कैसे घटा
साल 2010 में स्वीडन में करीब 40% ट्रांजेक्शन कैश में होते थे।
लेकिन 2023 तक यह घटकर 1% से भी कम रह गया।
अब 2025 में यह आंकड़ा लगभग शून्य हो गया है — यानी स्वीडन पूरी तरह डिजिटल हो गया है।
दुनिया के लिए एक मिसाल
स्वीडन की यह उपलब्धि दुनिया के बाकी देशों के लिए एक प्रेरणा है।
जहां कई देश अभी भी डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं स्वीडन ने दिखा दिया है कि टेक्नोलॉजी को अपनाकर एक पूरा देश कैशलेस बन सकता है।
स्वीडन की यह सफलता बताती है कि जब सरकार, बैंक और नागरिक मिलकर कदम बढ़ाते हैं तो बदलाव संभव है।
अब सवाल यह है कि अगला देश कौन होगा जो इस डिजिटल दौड़ में स्वीडन का साथ पकड़ेगा?
