बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों का इंतज़ार तेज़ हो गया है। 14 नवंबर को मतगणना शुरू होने वाली है और इससे पहले सामने आए एग्जिट पोल ने राज्य की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक, परिणाम भले ही एनडीए के पक्ष में जाते दिख रहे हों, लेकिन इस चुनाव में सबसे अहम भूमिका मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बताई जा रही है। आंकड़े इस ओर संकेत कर रहे हैं कि सरकार बनाने का रास्ता उन्हीं से होकर गुज़रता है।
एग्जिट पोल में अनुमान जताया गया है कि एनडीए बहुमत के करीब है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर राजद उभरती दिखाई दे रही है। तेजस्वी यादव की अगुवाई वाली राजद इस बार चुनाव में शीर्ष स्थान पर रह सकती है। दूसरी ओर जदयू इस बार दूसरे नंबर की पार्टी बनने का अनुमान है। इससे जदयू और उनके नेता नीतीश कुमार चुनाव के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गए हैं। वहीं बीजेपी के लिए एग्जिट पोल अच्छे संकेत नहीं दे रहे, क्योंकि इस बार उसका प्रदर्शन पिछली बार से कमजोर दिख रहा है।
एक्सिस माय इंडिया के अनुसार, बिहार की 243 सीटों में से एनडीए को 121 से 141 सीटें मिल सकती हैं। इनमें बीजेपी को 50-56 सीटों का अनुमान है, जबकि पिछले चुनाव में उसके पास 74 सीटें थीं। जदयू को 56-62 सीटें मिलने का अनुमान है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को 11-16 सीटें, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को 2-3 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 2-4 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
उधर, महागठबंधन को 98-118 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें राजद को 67-76 सीटें मिलने का अनुमान है, जो उसे इस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी बनाता है। कांग्रेस के खाते में 17-21 सीटें आ सकती हैं। विकासशील इंसान पार्टी को 3-5, लेफ्ट पार्टियों को 10-14 और इंडिया इंक्लूसिव पार्टी को 0-1 सीट मिलने का अनुमान है।
अगर इन आंकड़ों को ध्यान से देखें तो यह साफ हो जाता है कि इस बार नीतीश कुमार की भूमिका निर्णायक है। आंकड़े संकेत देते हैं कि नीतीश जिस पक्ष में खड़े होंगे, बिहार में वही सरकार बनाने में सफल होगा। वर्तमान में जदयू एनडीए का हिस्सा है और गठबंधन को बहुमत मिलता दिख रहा है। लेकिन राजनीतिक गणित यह भी कहता है कि अगर नीतीश कुमार पाला बदलते हुए तेजस्वी यादव के साथ आ जाएं तो राजद की अनुमानित 67-76 सीटें और जदयू की 56-62 सीटें मिलकर आसानी से बहुमत से ऊपर जा सकती हैं। एग्जिट पोल ने बिहार की राजनीति में नई दिलचस्पी पैदा कर दी है। जहां एक तरफ गठबंधनों की मजबूती और कमजोरी पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर सबकी नजरें नीतीश कुमार पर टिक गई हैं, जो इस बार किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
