बांग्लादेश इस समय गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल आज अपना फैसला सुनाने जा रहा है। इस फैसले का सीधा प्रसारण ढाका के कई बड़े स्क्रीन पर किया जाएगा और इसे सोशल मीडिया पर भी देखा जा सकेगा। फैसले से पहले राजधानी और अन्य क्षेत्रों में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं।
हिंसा देखते ही गोली मारने का आदेश
अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस की सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को हिंसा या आगजनी करने वालों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया है। कई शहरों में बीते 24 घंटे में देसी बम धमाके, बसों में आगजनी और पुलिस पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। ढाका पुलिस आयुक्त ने साफ कहा है कि कोई भी जानलेवा हमला करने की कोशिश करेगा तो सुरक्षा बल सीधे कार्रवाई करेंगे।
शेख हसीना का भावुक संदेश
फैसले से पहले शेख हसीना ने एक ऑडियो संदेश जारी कर कहा, “अन्याय करने वालों को जनता खुद सजा देती है। डरने की कोई बात नहीं है, मैं जिंदा हूं और अपने देश की जनता के साथ हूं।”
हसीना की पार्टी अवामी लीग को पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया है और चुनाव लड़ने पर रोक बनी हुई है।
हसीना के बेटे की चेतावनी
78 वर्षीय शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी पर प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि ट्रिब्यूनल का फैसला पहले से तय जैसा लग रहा है और उम्मीद जताई कि हसीना को कठोर सजा, संभवतः मौत की सजा सुनाई जा सकती है।
वाजेद ने यह भी कहा कि उनकी मां भारत में सुरक्षित हैं और भारत सरकार उन्हें पूरी सुरक्षा दे रही है।
देशभर में हिंसा की घटनाएं
ढाका में मोहम्मद यूनुस के सलाहकार सैयद रिजवाना हसन के घर के बाहर क्रूड बम फेंके गए। कई इलाकों में आगजनी हुई। कॉक्सबाजार और अन्य जिलों में अवामी लीग के समर्थकों के प्रदर्शन की खबरें आईं। पुलिस स्टेशन परिसर में भीषण आगजनी और कई सार्वजनिक स्थानों पर बम विस्फोटों ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
कौन-कौन हैं आरोपी?
इस चर्चित मामले में तीन प्रमुख आरोपी हैं—
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शेख हसीना, जो इस समय भारत में हैं।
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पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल
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पूर्व पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल मामून – जो सरकारी गवाह बन गए हैं।
सरकारी वकीलों ने ट्रिब्यूनल से हसीना को अधिकतम सजा देने और दोषियों की संपत्ति जब्त करने की मांग की है।
किस बात का है मुकदमा?
शेख हसीना पर 2024 में हुए छात्र विद्रोह के दौरान गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन, हत्या, यातना और दमन का आरोप है। इन घटनाओं में 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया गया है। यह मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला और आरोपों को 2025 में औपचारिक रूप से दर्ज किया गया।
