पंजाब सरकार ने बिजली से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए लोगों को बड़ी राहत दी है। कैबिनेट मंत्री संजय अरोड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि अब राज्य में किसी भी नए बिजली कनेक्शन के लिए ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC)’ की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार का यह फैसला लोगों की सुविधा और अनावश्यक दिक्कतों को खत्म करने के उद्देश्य से लिया गया है।
अब सिर्फ दो दस्तावेज़ में मिलेगा कनेक्शन
नए नियम के अनुसार, बिजली कनेक्शन लेने के लिए अब ग्राहकों को केवल दो दस्तावेज़ जमा कराने होंगे:
- रजिस्ट्री या लीज़ डीड
- पहचान पत्र
मंत्री अरोड़ा ने कहा कि पहले NOC की वजह से लोगों को कनेक्शन लेने में काफी समय लगता था। कई मामलों में लोग कनेक्शन न मिलने पर मजबूरी में ‘कुंडी कनेक्शन’ का इस्तेमाल करते थे। इससे भारी जुर्माना लगता था, जिसे भरना कई परिवारों के लिए मुश्किल हो जाता था। नया नियम इस परेशानी को काफी हद तक खत्म कर देगा।
गैर-कानूनी निर्माण की जिम्मेदारी किसकी?
गैर-कानूनी कॉलोनियों या अवैध निर्माण वाले घरों में बिजली कनेक्शन को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह जिम्मेदारी नगऱ निगम, नगर परिषद, गमाडा और पुड्डा जैसी संबंधित एजेंसियों की है। बिजली विभाग का काम केवल कनेक्शन देना है, जबकि निर्माण से जुड़े नियम और उनकी वैधता पर फैसला ये संस्थाएँ करती हैं।
स्मार्ट मीटर पर भी दिया बयान
स्मार्ट मीटर की स्थिति पर बात करते हुए अरोड़ा ने बताया कि केंद्र सरकार ने जिन राज्यों की सूची जारी की है, उसमें पंजाब का नाम शामिल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार लोगों पर स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव नहीं बना रही है।
“अगर उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगवाना चाहते हैं, तो वे लगा सकते हैं। अगर लोग इसे आवश्यक नहीं समझते, तो पुराने मीटर भी चल सकते हैं,” उन्होंने कहा।
सरकार का उद्देश्य – लोगों को राहत और व्यवस्था में सुधार
सरकार का कहना है कि इस फैसले के बाद बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया सरल होगी और लोग आसानी से वैध कनेक्शन ले सकेंगे। इससे चोरी की बिजली कम होगी और उपभोक्ताओं को होने वाला आर्थिक नुकसान भी रुकेगा।
नया नियम खासकर उन लोगों के लिए राहत भरा साबित होगा जो लंबे समय से कागजी कार्रवाई और NOC की वजह से परेशान थे। अब केवल दो दस्तावेज़ों के आधार पर कनेक्शन मिल सकेगा, जिससे प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी बनेगी।
