दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खास और तेज़ ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन को “CyHawk” नाम दिया गया। पुलिस का कहना है कि इसका मकसद दिल्ली और आसपास के इलाकों में सक्रिय साइबर ठगी करने वाले मॉड्यूल्स को खत्म करना था। यह अभियान लगातार 48 घंटे तक चला और इसके नतीजे चौंकाने वाले रहे।
48 घंटे की नॉन-स्टॉप कार्रवाई
जॉइंट पुलिस कमिश्नर (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) रजनीश गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कई जिलों में एक साथ दबिश देकर यह ऑपरेशन चलाया गया। दिल्ली पुलिस की अलग-अलग टीमों ने संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की। इसे अब तक का सबसे समन्वित साइबर-एंटी फ्रॉड ऑपरेशन माना जा रहा है।
877 आरोपी पकड़े गए, 509 को नोटिस
पुलिस के मुताबिक शुक्रवार सुबह तक कुल 877 लोगों को गिरफ्तार किया गया या कानूनी तौर पर ‘बाउंड डाउन’ किया गया है। यह संख्या बताती है कि साइबर अपराध कितना बड़ा नेटवर्क बन चुका है। पुलिस ने 509 संदिग्ध लोगों को नोटिस भी भेजे हैं, जिनसे आगे पूछताछ और दस्तावेज़ की जांच की जाएगी।
ऑनलाइन ठगी वाले गैंग बने मुख्य निशाना
CyHawk अभियान का फोकस उन साइबर मॉड्यूल्स पर था जो दिल्ली-एनसीआर के लोगों को ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार बना रहे थे। पुलिस ने टेक्निकल डाटा, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण कर इन गैंग्स को ट्रैक किया।
जॉब फ्रॉड से लेकर इन्वेस्टमेंट स्कैम तक बड़ी सफलता
पुलिस ने बताया कि जॉब फ्रॉड वाले कई गैंग पकड़े गए, जो फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए लोगों को नौकरी का लालच देते थे। वे पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन शुल्क या इंटरव्यू चार्ज के नाम पर पैसे लेते और फिर गायब हो जाते थे।
इन्वेस्टमेंट फ्रॉड वाले मॉड्यूल हाई रिटर्न और तेज़ कमाई का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठते थे। ये फ्रॉडर्स ऑनलाइन ट्रेडिंग, क्रिप्टो और फॉरेक्स के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी कर रहे थे। पुलिस ने इनके डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
वर्क-फ्रॉम-होम फ्रॉड में भी पुलिस को बड़ी सफलता मिली। आरोपियों का तरीका बेहद संगठित था—वे छोटे ऑनलाइन टास्क दिलाने का दावा करते और साइनअप या सिक्योरिटी राशि वसूलकर गायब हो जाते थे।
फर्जी कॉल सेंटरों पर छापेमारी
ऑपरेशन के दौरान कई फर्जी कॉल सेंटर भी पकड़े गए, जहां से देश-विदेश के लोगों को ठगा जाता था। यहां से मिले कंप्यूटर, सर्वर और मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
साइबर नेटवर्क्स पर बड़ी चोट
पुलिस का कहना है कि यह ऑपरेशन उन गैंग्स पर बड़ा प्रहार है जो लंबे समय से टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल करके लोगों को ठग रहे थे। कई मास्टरमाइंड्स की पहचान हो चुकी है और पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
