सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के मौके पर पंजाब सरकार द्वारा आयोजित विशेष विधानसभा सत्र में कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने भावुक होकर गुरु साहिब को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत दुनिया की उन चुनिंदा कुर्बानियों में से है, जो किसी दूसरे धर्म की रक्षा के लिए दी गईं।
अमन अरोड़ा ने कहा— “गुरु साहिब ने अपने शरीर के दो टुकड़े करवाए, लेकिन हिंदोस्तान के तमाम धर्मों और मज़हबों को एकजुट कर गए।”
‘न हिंदू राष्ट्र, न खालिस्तान— जुग-जुग जिवे मेरा हिंदोस्तान’
अपने भाषण में मंत्री अरोड़ा ने कहा कि गुरु साहिब को सच्ची श्रद्धांजलि यही हो सकती है कि देश को किसी भी तरह की धार्मिक या राजनीतिक विभाजन की कोशिशों से दूर रखा जाए।
उन्होंने कहा— “गुरु साहिब की शहादत हमें सिखाती है कि देश को जोड़कर रखना ही सबसे बड़ा धर्म है। न हिंदू राष्ट्र, न खालिस्तान— जुग-जुग जिवे मेरा हिंदोस्तान।”
शहीदों की धरती से जुड़े किस्से भी साझा किए
अमन अरोड़ा ने गर्व से बताया कि वे सुनाम श्री उधम सिंह वाला विधानसभा क्षेत्र से आते हैं, जिसका संबंध उन महान शहीदों से है जिन्होंने गुरु साहिब की शहादत के दौरान अपार बलिदान दिए—
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भाई मती दास जी, जिन्हें आरी से चीर दिया गया
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भाई सती दास जी, जिन्हें रूई में लपेटकर जला दिया गया
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भाई दयाला जी, जिन्हें उबलते तेल में डालकर शहीद किया गया
उन्होंने कहा— “ये शहीद अडोल खड़े रहे, सी तक न की और गुरु का नाम लेते रहे। हम तो उनके चरणों की धूल के बराबर भी नहीं हैं।”
सरकार गुरुओं की राह पर चलने के लिए प्रतिबद्ध
अमन अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले ढाई सालों में कोशिश की है कि गुरु साहिब के दिखाए मार्ग पर चला जाए। उन्होंने बताया कि 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित आयोजनों की योजना एक साल पहले ही शुरू कर दी गई थी।
उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि आखिर क्यों कुछ लोग कहते हैं कि धार्मिक आयोजन सरकार का काम नहीं है?
उनके अनुसार— “धर्म और समाज की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। आज जब देशभर में धर्म और मज़हब के नाम पर दीवारें खड़ी की जा रही हैं, ऐसे समय में गुरु साहिब के संदेश को दोहराना बेहद ज़रूरी है।”
‘पंजाब की आवाज़ देश तक पहुंचाने का समय’
उन्होंने कहा कि आज का विशेष सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि पंजाब के तीन करोड़ लोग पूरे देश को संदेश दे सकें कि गुरु तेग बहादुर जी का त्याग केवल पंजाब का नहीं, बल्कि पूरे भारत का मार्गदर्शन करता है।
अमन अरोड़ा ने अंत में दोहराया—
“गुरु साहिब की असली अरदास यही है—
न हिंदू राष्ट्र, न खालिस्तान…
जुग-जुग जिवे मेरा हिंदोस्तान!”
यह सत्र गुरु साहिब की शहादत के मूल संदेश— एकता, धर्म-निरपेक्षता और मानवता— को देशभर में फैलाने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
