बुधवार को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा। BSE सेंसेक्स 31.46 अंक (0.04%) फिसलकर 85,106.81 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी भी थोड़ी कमजोरी के साथ 26,000 के नीचे फिसल गया। लगातार चौथे दिन गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
बाजार पर दबाव क्यों?
आज के कारोबार में कई सेक्टरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। विदेशी निवेशक (FII) पिछले कुछ दिनों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। इसके साथ ही रुपये की कमजोरी ने भी सेंसेक्स और निफ्टी को संभलने नहीं दिया।
वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर देखा गया।
किन सेक्टर्स में था असर?
-
बैंकिंग और आईटी शेयरों में हल्की तेजी देखी गई
-
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव
-
मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर में बिकवाली
-
विदेशी संकेतों के कारण इंडेक्स में अस्थिरता रही
कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान पर बंद हुए, जिससे बाजार की कुल धारणा कमजोर रही।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे समय पर निवेशकों को जल्दबाज़ी में खरीद-फरोख्त करने से बचना चाहिए।
-
मजबूत और स्थिर कंपनियों के शेयरों पर नजर रखें
-
फंडामेंटल्स पर आधारित निवेश को प्राथमिकता दें
-
शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग में सावधानी बरतें
-
डॉलर की मजबूती से जुड़े सेक्टरों पर निगाह रखें
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि रुपये की कमजोरी जारी रही तो आयात से जुड़े सेक्टरों में और दबाव देखने को मिल सकता है।
RBI नीति पर टिकी बाजार की नज़र
अब निवेशकों की नजर शुक्रवार को आने वाली RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC Meeting) पर है।
यदि रिज़र्व बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव करता है या नीति संकेतों में परिवर्तन होता है, तो अगले सत्रों में बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार भावनाएँ काफी संवेदनशील हैं और कोई भी बड़ा आर्थिक संकेत बाजार को ऊपर या नीचे ले जा सकता है।
चौथे दिन की गिरावट के बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा मौका हो सकती है। आने वाले कुछ दिनों में बाजार धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ सकता है।
