राज्यसभा सदस्य और प्रसिद्ध समाजसेवी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने रूस की सेना में फंसे भारतीय युवाओं की सुरक्षित घर वापसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान इस मुद्दे को विशेष प्राथमिकता के साथ उठाया जाए।
कैसे फंस गए भारतीय युवक?
संत सीचेवाल ने बताया कि कई युवक रोज़गार या दूसरे कामों के लिए रूस गए थे, लेकिन कुछ ट्रैवल एजेंटों ने उन्हें धोखे से रूसी सेना में भर्ती करवा दिया। इन युवाओं को बिना उचित सैन्य ट्रेनिंग के सीधे आधुनिक हथियार पकड़ा दिए गए और यूक्रेन की सीमा पर भेज दिया गया। यह स्थिति न सिर्फ खतरनाक है बल्कि गंभीर मानवाधिकार चिंता भी है।
संसद में भी उठ चुका है मुद्दा
संत सीचेवाल ने अपने पत्र में यह भी याद दिलाया कि इस विषय को 24 जुलाई 2025 को राज्यसभा के मानसून सत्र में उठाया गया था। सरकार की ओर से बताया गया था कि कुल 127 भारतीय युवाओं को रूसी सेना में भर्ती किया गया था।
इनमें से 98 युवकों को वापस भारत लाया जा चुका है, जबकि 13 अभी भी रूस में फंसे हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 12 युवक अब तक लापता हैं और उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रूस दौरे के दौरान उठाने की अपील
संत सीचेवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से विशेष अनुरोध किया है कि पुतिन के भारत आगमन के दौरान इस संवेदनशील मुद्दे को नेताओं के स्तर पर चर्चा में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि दोनों देशों की बातचीत से बाकी बचे भारतीय युवाओं को जल्द और सुरक्षित वापस लाया जा सकता है।

यह सिर्फ कूटनीति नहीं, मानवीय मामला है
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा राजनीति या कूटनीति तक सीमित नहीं है। यह उन परिवारों के दर्द से जुड़ा मामला है जिनके बच्चे महीनों से घर नहीं लौटे। कई माता-पिता हर दिन भगवान के आगे अपने बच्चों की सलामती की अरदास कर रहे हैं।
परिजनों की उम्मीदें
संत सीचेवाल ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले पर तेज़ी से कदम उठाएगी और सभी युवक जल्द अपने परिवारों से मिल पाएंगे। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की पीड़ा को समझना और उनकी मदद करना देश का नैतिक कर्तव्य है।
