पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राज्य की स्कूली शिक्षा को मजबूत करने के लिए एक अहम पहल की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर को स्कूल शिक्षा विभाग, स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs) के सहयोग से, राज्यभर के सभी सरकारी स्कूलों में माता-पिता की भागीदारी पर वर्कशॉप और एक मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) का आयोजन करेगा। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाना है।
माता-पिता को कैसे होगा फायदा
रियात बाहरा यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन वर्कशॉप्स का मुख्य मकसद माता-पिता को सशक्त बनाना है। सरकार चाहती है कि हर अभिभावक को अपने बच्चे की पढ़ाई, उसकी प्रगति और सरकारी स्कूलों की भूमिका की पूरी जानकारी हो। इसके साथ ही माता-पिता यह भी समझ सकेंगे कि स्कूल के विकास में उनकी भागीदारी कितनी अहम है। यह पहल घर और स्कूल के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगी, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।
पहली वर्कशॉप 20 दिसंबर को
हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस श्रृंखला की पहली वर्कशॉप 20 दिसंबर को आयोजित की जाएगी। इसमें अभिभावकों को यह बताया जाएगा कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई में किस तरह सहयोग कर सकते हैं और स्कूल से बेहतर तालमेल कैसे बना सकते हैं।
शिक्षा क्रांति पर सरकार का फोकस
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बुनियादी ढांचे के सुधार तक फैला हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य के करीब 12,000 सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके तहत नई या मरम्मत की गई चारदीवारियां, कक्षाएं, शौचालय और खेल मैदान तैयार किए गए हैं।
स्कूल ऑफ एमिनेंस की स्थापना
बैंस ने जानकारी दी कि राज्य के 118 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस “स्कूल ऑफ एमिनेंस” में बदला गया है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और उन्नत सीखने का माहौल तैयार किया गया है।
सभी के सहयोग की अपील
अपने संबोधन के अंत में शिक्षा मंत्री ने सरकारी स्कूलों के स्टाफ से इस अभियान को सफल बनाने में पूरा सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा देना है, ताकि पंजाब का भविष्य और मजबूत बन सके।
