दिल्ली-एनसीआर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इलाके में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 500 के पार दर्ज किया गया है, जो गंभीर से भी ऊपर की श्रेणी मानी जाती है। ऐसे में लोगों को एक साथ कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
तीन तरफ से हमला: स्मॉग, ठंड और कोहरा
इस समय लोगों पर मानो “तिहरा अटैक” हो रहा है। एक तरफ जहरीला स्मॉग सांस लेना मुश्किल बना रहा है, दूसरी ओर कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है और तीसरी समस्या है घना कोहरा। ठंड बढ़ने के साथ-साथ सुबह और रात के समय कोहरे की परत सड़कों पर छा रही है, जिससे हालात और भी मुश्किल हो गए हैं।
कम हुई विजिबिलिटी, सड़कों पर रेंग रहे वाहन
फॉग और स्मोक के मेल ने सड़कों पर विजिबिलिटी को काफी कम कर दिया है। कई इलाकों में कुछ मीटर आगे तक देख पाना भी मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर ट्रैफिक पर पड़ रहा है। हाईवे और मुख्य सड़कों पर वाहन बेहद धीमी रफ्तार से चल रहे हैं, जिससे जाम जैसी स्थिति बन रही है और हादसों का खतरा बढ़ गया है।
पहले हो चुके हैं गंभीर सड़क हादसे
बीते दिनों यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे पर कोहरे और धुएं की वजह से कई बड़े सड़क हादसे सामने आए थे। इन दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान भी गई थी। इन्हीं घटनाओं के बाद प्रशासन और सरकार ने लोगों को सतर्क रहने और वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी थी।
हाईवे पर घटाई गई रफ्तार की सीमा
बढ़ते खतरे को देखते हुए नोएडा हाईवे और यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की स्पीड लिमिट कम कर दी गई है। इसका मकसद यह है कि वाहन नियंत्रित गति से चलें और दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके। ट्रैफिक पुलिस लगातार हाईवे और प्रमुख सड़कों पर निगरानी कर रही है।
पुलिस की अपील: फॉग लाइट का करें इस्तेमाल
नोएडा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। वाहन चलाते समय फॉग लाइट का प्रयोग करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तेज रफ्तार से बचें। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की जहरीली हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर खतरा
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में प्रदूषण, ठंड और कोहरा तीनों ही लोगों की सेहत और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। प्रशासन की सलाह का पालन करना और सावधानी बरतना ही फिलहाल सबसे बेहतर उपाय है।
