पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सदन की शुरुआत भावुक माहौल में हुई, जब चारों साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवान ने सदन में चारों साहिबजादों की बेमिसाल शहादत को याद किया और उनके बलिदान के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान पूरे सदन ने सम्मान में मौन रखा। इसके बाद स्पीकर ने कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करने की घोषणा की।
साहिबजादों का बलिदान आज भी प्रेरणा
श्रद्धांजलि के दौरान यह बताया गया कि चारों साहिबजादों का बलिदान केवल सिख इतिहास ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए साहस, धर्म और मानवता की मिसाल है। उनका त्याग आज भी आने वाली पीढ़ियों को सच्चाई और न्याय के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
“हमारी पहचान के लिए बहाया गया खून”
आम आदमी पार्टी के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने सदन में बोलते हुए कहा कि चारों साहिबजादों ने हमारे सम्मान और पहचान की रक्षा के लिए अपना खून बहाया। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि सिख इतिहास और साहिबजादों की वीरगाथा को देश के बड़े मंचों तक पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सिख धर्म अन्याय के खिलाफ खड़ा होने की ताकत देता है।
खालसा पंथ और सामाजिक बदलाव
विधायकों ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा पंथ की स्थापना ने समाज में बड़ा बदलाव लाया। यह एक ऐसा आंदोलन था जिसने समानता, साहस और आत्मसम्मान का संदेश दिया। वक्ताओं के अनुसार, सिख धर्म ने उस दौर में दबे-कुचले वर्गों को आवाज दी और सामाजिक बराबरी की नींव रखी।
धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च त्याग
सदन में बोलते हुए विधायक डॉ. नछत्तर पाल सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब के मार्गदर्शन में खालसा पंथ से कई महान योद्धा और सेनापति निकले, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया। चारों साहिबजादों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
इतिहास से सीख लेने का संदेश
सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि साहिबजादों का बलिदान केवल अतीत की घटना नहीं, बल्कि आज के समय में भी हमें सच्चाई, साहस और इंसानियत के मूल्यों को अपनाने की सीख देता है। पंजाब विधानसभा में दी गई यह श्रद्धांजलि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को जीवंत रखने का संदेश बनकर सामने आई।
