MNREGA में किए गए बदलावों के विरोध में पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंजाब विधानसभा में इस मुद्दे पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इस अहम चर्चा के समय बीजेपी के दो विधायक सदन में मौजूद नहीं थे, जिस पर भी सियासी हलकों में चर्चा रही।
MNREGA में बदलाव पर सरकार का कड़ा रुख
विधानसभा में पेश प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) में किए गए बदलावों का विरोध दर्ज कराया गया। पंजाब सरकार का कहना है कि इन बदलावों से ग्रामीण मजदूरों के अधिकार प्रभावित होंगे और राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह मजदूरों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान बढ़ा तनाव
प्रस्ताव पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान जब सदन में अपनी बात रख रहे थे, तभी कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने उन्हें बार-बार टोका। इससे सदन का माहौल गर्म हो गया और कार्यवाही में व्यवधान आने लगा।
विधानसभा अध्यक्ष का सख्त फैसला
लगातार व्यवधान के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सुखपाल सिंह खैरा को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए सदन में शोरगुल का माहौल बना रहा।
BJP विधायकों की गैरमौजूदगी पर सवाल
इस अहम प्रस्ताव के दौरान बीजेपी के दो विधायकों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही। सत्ता पक्ष ने इसे गंभीर मुद्दे से दूरी बनाने का संकेत बताया, जबकि विपक्ष की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
प्रस्ताव पारित, केंद्र को भेजा जाएगा संदेश
सदन में हुई बहस और हंगामे के बावजूद अंत में MNREGA में बदलाव के खिलाफ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सरकार का कहना है कि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार तक भेजा जाएगा, ताकि पंजाब की आपत्तियों और चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा जा सके।
ग्रामीण मजदूरों के मुद्दे पर राजनीति तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि MNREGA को लेकर पंजाब की राजनीति और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
