पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूत करने के लिए भगवंत मान सरकार 5 जनवरी से ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान का दूसरा फेज़ शुरू करने जा रही है। सरकार का लक्ष्य इस बार सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे को जड़ से खत्म करने के लिए समाज को भी पूरी तरह साथ जोड़ना है।
गांव और पंचायत स्तर पर सख्त तालमेल
इस चरण में गांव और पंचायत स्तर पर बेहतर तालमेल बनाया जाएगा। प्रशासन, पंचायतें और स्थानीय संस्थाएं मिलकर अपने-अपने इलाकों में नशे की गतिविधियों पर नजर रखेंगी। सरकार का फोकस ड्रग्स की सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ने पर रहेगा।
घर-घर जाकर जागरूकता अभियान
नशे के खिलाफ लड़ाई में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इन अभियानों के जरिए लोगों को नशे के नुकसान बताए जाएंगे और युवाओं को इससे दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाएगा। नागरिकों को सीधे इस मुहिम का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि वे अपने इलाके में नशे के खिलाफ आवाज उठा सकें।
तस्करों पर सख्त कार्रवाई जारी
सरकार ने साफ किया है कि ड्रग्स तस्करों और नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी। पुलिस और संबंधित एजेंसियां लगातार छापेमारी करेंगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रिहैबिलिटेशन पर विशेष जोर
इस अभियान की खास बात यह है कि नशे से उबर चुके लोगों के पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे लोगों को समाज में दोबारा सम्मान के साथ जोड़ने और दूसरों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने के लिए आगे लाया जाएगा।
लंबी निगरानी की तैयारी
सरकार पंचायतों और जमीनी संस्थानों की क्षमता बढ़ाएगी, ताकि लंबे समय तक नशे पर निगरानी रखी जा सके। मान सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब सरकार और समाज मिलकर कदम उठाएं।
