पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया है कि वे श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष किसी पद की हैसियत से नहीं, बल्कि एक साधारण और विनम्र सिख के रूप में उपस्थित होंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सिख मर्यादा और आस्था सर्वोपरि है, और पावन तख़्त साहिब से आया हर हुक्म उनके लिए सिर-माथे है।
‘एक्स’ पर साझा की आस्था की बात
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि श्री अकाल तख़्त साहिब प्रत्येक सिख के लिए सबसे पावन स्थान है और इसे सिखों का सर्वोच्च धार्मिक आसन माना जाता है। उन्होंने कहा कि तख़्त साहिब से प्राप्त हुक्म का पालन करना उनका कर्तव्य है और वे उसे पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं।
नंगे पांव होकर हाज़िरी देने का संकल्प
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वे श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष नंगे पांव चलकर हाज़िर होंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि वे यह उपस्थिति मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक विनम्र सिख के रूप में दर्ज कराएंगे। यह वक्तव्य उनकी व्यक्तिगत आस्था और सिख परंपराओं के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बावजूद प्राथमिकता आस्था को
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 15 जनवरी को देश के राष्ट्रपति के श्री गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में होने वाले एक सम्मेलन में शामिल होने का कार्यक्रम होने के बावजूद वे हर हाल में श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष उपस्थित होंगे। उन्होंने कहा कि पावन तख़्त साहिब सर्वोच्च है और वहां से आया हुक्म किसी भी अन्य कार्यक्रम से ऊपर है।
परिवार के लिए भी सर्वोच्च है तख़्त साहिब का हुक्म
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भावुक शब्दों में कहा कि श्री अकाल तख़्त साहिब से आया हुक्म उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए हमेशा सर्वोच्च रहा है, है और रहेगा। यह कथन बताता है कि उनकी आस्था केवल सार्वजनिक बयान तक सीमित नहीं, बल्कि निजी जीवन का भी अभिन्न हिस्सा है।
आस्था, मर्यादा और विनम्रता का संदेश
मुख्यमंत्री का यह रुख न सिर्फ सिख परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सत्ता में रहते हुए भी व्यक्ति अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रह सकता है। उनका यह संदेश पंजाब और सिख समाज में विनम्रता, मर्यादा और आस्था की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
