अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाले प्रस्ताव को समर्थन दिए जाने के बाद भारतीय शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। खासतौर पर उन भारतीय कंपनियों के शेयरों पर इसका सीधा असर पड़ा है, जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करती हैं। गुरुवार को इन कंपनियों के शेयरों में 12 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी और शुक्रवार को भी कमजोरी का दौर जारी रहा।
क्यों गिर रहे हैं एक्सपोर्टर कंपनियों के शेयर
दरअसल, ट्रंप ने एक ऐसे बिल का समर्थन किया है, जिसके तहत अगर कोई देश रूस से तेल या ऊर्जा उत्पाद खरीदता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकता है। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो यह अतिरिक्त टैक्स पहले से लागू 50% आयात शुल्क के ऊपर लगेगा। भारत जैसे देश, जो सस्ता रूसी तेल खरीद रहे हैं, इस फैसले से सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
टेक्सटाइल, सीफूड और दवा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर
गुरुवार के कमजोर कारोबारी सत्र में टेक्सटाइल, कपड़ा, सीफूड और फार्मा सेक्टर की कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। गोकलदास एक्सपोर्ट्स, केपीआर मिल, वर्धमान टेक्सटाइल्स और वेलस्पन लिविंग जैसे टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के शेयर 2 से 12 फीसदी तक गिर गए। वहीं झींगा और सीफूड निर्यात करने वाली अवंती फीड्स, एपेक्स फ्रोजन फूड्स और कोस्टल कॉर्पोरेशन के शेयरों में 2 से 8 फीसदी की गिरावट देखी गई।
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भी इनमें 1 से 2 फीसदी तक की कमजोरी रही, हालांकि बाद में कुछ शेयरों में हल्की रिकवरी भी नजर आई।
एक्सपर्ट्स की चेतावनी: बड़ा झटका लग सकता है
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टैरिफ बिल मंजूरी पा जाता है, तो भारतीय एक्सपोर्टर कंपनियों को बड़ा झटका लग सकता है। इनमें से कई कंपनियों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। भारी टैरिफ लगने से इनके प्रोडक्ट महंगे हो जाएंगे, जिससे मांग घट सकती है और मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
अमेरिका क्यों लाया यह सख्त बिल
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिल का मकसद भारत और चीन जैसे देशों पर दबाव बनाना है, जो रूस से सस्ता तेल और ऊर्जा उत्पाद खरीद रहे हैं। प्रस्ताव के तहत, राष्ट्रपति को उन देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामान और सेवाओं पर कम से कम 500% तक ड्यूटी बढ़ानी होगी, जो रूसी मूल के यूरेनियम, पेट्रोलियम या ऊर्जा उत्पादों के व्यापार में शामिल हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार डील पर भी संकट
इस नए बिल से भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदों को भी झटका लगा है। पहले माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। गौरतलब है कि 2 अप्रैल को ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में अगस्त के अंत तक बढ़ाकर 50% कर दिया गया। तब से ही टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार दबाव में बना हुआ है।
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
मौजूदा हालात में निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि एक्सपोर्ट-आधारित शेयरों में निवेश करते समय फिलहाल सतर्कता बरती जाए और वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर रखी जाए, क्योंकि आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
