पंजाब सरकार ने शहीद भगत सिंह के ऐतिहासिक मुकदमे से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज़ों को हासिल करने के लिए ब्रिटेन से औपचारिक सहयोग मांगा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 9 जनवरी को ब्रिटेन की उप उच्चायुक्त अल्बा स्मेरिग्लियो को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया।
पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिली है कि भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम हरि राजगुरु के मुकदमे से संबंधित मूल ऑडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य अभिलेखीय दस्तावेज इस समय स्कॉटलैंड में मौजूद हैं।
स्कॉटलैंड में सुरक्षित बताए जा रहे हैं अभिलेख
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि उस दौर के ऐतिहासिक कानूनी दस्तावेज़ संभवतः किसी संग्रहालय या संस्थान में संरक्षित हैं। ये दस्तावेज़ उस ऐतिहासिक मुकदमे की कार्यवाही से जुड़े हैं, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा को गहराई से प्रभावित किया था।
पंजाब सरकार क्यों चाहती है ये रिकॉर्ड
पंजाब सरकार का कहना है कि ये अभिलेख न सिर्फ पंजाब के लोगों के लिए, बल्कि दुनिया भर के इतिहासकारों और मानवाधिकारों से जुड़े विद्वानों के लिए भी गहरे ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखते हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इनकी प्रतियां उपलब्ध कराने की अपील करते हुए कहा कि इनका उपयोग शैक्षणिक अध्ययन, डिजिटल संरक्षण और शहीद भगत सिंह हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए किया जाएगा।
न्याय और त्याग के मूल्यों का हवाला
पत्र में आम आदमी पार्टी के नेता ने इस अपील के पीछे “न्याय, त्याग और मानव गरिमा” जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन दस्तावेज़ों को साझा करना केवल इतिहास को सहेजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम की वास्तविक तस्वीर दिखाना भी है।
लाहौर षड्यंत्र केस की पृष्ठभूमि
भगत सिंह को मात्र 23 वर्ष की आयु में 23 मार्च 1931 को सुखदेव और राजगुरु के साथ फांसी दी गई थी। उन पर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या का आरोप था। यह मामला इतिहास में लाहौर षड्यंत्र केस के नाम से जाना जाता है।
इतिहास को करीब से देखने की कोशिश
पंजाब सरकार की यह पहल शहीदों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि ये दस्तावेज़ उपलब्ध होते हैं, तो आज़ादी के संघर्ष से जुड़ा यह अध्याय और भी जीवंत रूप में लोगों के सामने आ सकेगा।
