पंजाब सरकार ने अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त में होने वाले बड़े नकद लेन-देन पर सख्ती शुरू कर दी है। अब अगर किसी प्रॉपर्टी सौदे में 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा की राशि नकद में दी या ली जाती है, तो उसकी पूरी जानकारी सरकार तक पहुंचाना अनिवार्य होगा। इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन, पंजाब ने इस संबंध में राज्य के सभी रजिस्ट्रार-कम-डिप्टी कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
राज्य मुख्यालय और चंडीगढ़ तक जाएगी रिपोर्ट
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ऐसे हर नकद लेन-देन की रिपोर्ट पहले राज्य मुख्यालय भेजी जाएगी और उसके बाद डायरेक्टर इंटेलिजेंस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन, चंडीगढ़ को दी जाएगी। राज्य स्तर पर इन सभी मामलों की निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को समय रहते पकड़ा जा सके।
वित्तीय अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश
एक वरिष्ठ राजस्व अधिकारी के अनुसार, यह कदम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। सरकार का मानना है कि प्रॉपर्टी सौदों के जरिए काले धन को सफेद करने की कोशिशें लंबे समय से हो रही हैं। अब इस नई व्यवस्था से ब्लैक मनी के साथ-साथ ड्रग मनी, हवाला और संगठित अपराध से जुड़े पैसों के निवेश पर भी नजर रखी जा सकेगी।
ब्लैक मनी पर सीधा वार
पंजाब में अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि जमीन और मकान की खरीद-बिक्री में सौदे की असली कीमत छुपाई जाती है। रजिस्ट्रेशन के समय कम कीमत दर्ज होती है, जबकि बाकी भुगतान नकद में किया जाता है। अब 2 लाख रुपये या उससे अधिक के नकद भुगतान की रिपोर्टिंग अनिवार्य होने से ऐसे तरीकों पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
जांच, FIR और इनकम टैक्स तक सूचना
डायरेक्टर इंटेलिजेंस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर संदिग्ध सौदों की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज की जा सकती है और आयकर विभाग को भी जानकारी दी जा सकती है। यानी अब प्रॉपर्टी में काले धन का इस्तेमाल करना पहले से कहीं ज्यादा जोखिम भरा हो जाएगा।
रजिस्ट्रेशन दफ्तरों की बढ़ी जिम्मेदारी
इस आदेश के बाद रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों की भूमिका काफी अहम हो गई है। अब उन्हें सिर्फ दस्तावेज दर्ज करने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि यह भी देखना होगा कि किसी सौदे में 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा की नकद रकम तो शामिल नहीं है। लापरवाही या जानकारी छुपाने पर संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
आम लोगों पर क्या होगा असर
सरकार जहां इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है, वहीं छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले लोगों के लिए कुछ व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ सकती हैं। कई इलाकों में अब भी नकद लेन-देन आम है और बैंकिंग सुविधाएं सीमित हैं। अब लोगों को अपनी आय और भुगतान का पूरा हिसाब रखना होगा।
प्रॉपर्टी बाजार में बदलाव की उम्मीद
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी, हालांकि शुरुआती समय में सौदों की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। अब खरीदार और विक्रेता को पूरा भुगतान बैंकिंग माध्यमों से करना पड़ेगा, जिससे टैक्स का दायरा बढ़ेगा और काले धन पर रोक लगेगी।
