पंजाब में पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ अब जमीनी स्तर पर रंग लाती नजर आ रही है। सरकारी स्कूलों की बदली हुई सूरत और विश्वस्तरीय सुविधाओं के कारण अभिभावकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि इस वर्ष स्कूल ऑफ एमिनेंस और रेजिडेंशियल मेधावी स्कूलों में दाखिले के लिए रिकॉर्ड तोड़ आवेदन प्राप्त हुए हैं।
पंजाब सरकार के अनुसार, केवल 20,000 सीटों के लिए 2 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अब छात्र और अभिभावक निजी स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पंजाब में वर्तमान में 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस और 10 रेजिडेंशियल मेधावी स्कूल सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जहां हाईटेक क्लासरूम, आधुनिक लैब और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

स्कूल ऑफ एमिनेंस में 9वीं कक्षा के लिए कुल 4,248 सीटें निर्धारित हैं, जहां प्रत्येक स्कूल में लगभग 36 सीटें आवंटित की गई हैं। वहीं रेजिडेंशियल स्कूलों में मेधावी विद्यार्थियों के लिए 50 सीटें उपलब्ध हैं। केवल 9वीं कक्षा में प्रवेश के लिए अब तक 93,300 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें से 74,855 विद्यार्थियों ने सफलतापूर्वक अपना आवेदन जमा कर दिया है। शेष छात्र भी अपनी प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रभाव सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है। आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल लर्निंग, प्रशिक्षित शिक्षकों और बेहतर अकादमिक माहौल ने सरकारी स्कूलों की छवि पूरी तरह बदल दी है।
पंजाब की शिक्षा क्रांति का लक्ष्य केवल बुनियादी ढांचा सुधारना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी और आत्मविश्वासी बनाना है। रिकॉर्ड आवेदन इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में शुरू हुआ बदलाव अब व्यापक जनसमर्थन प्राप्त कर रहा है।
