पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था और मुद्रा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 92.43 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि इस दौरान भारतीय शेयर बाजार में हल्की तेजी भी देखी गई और बीएसई सेंसेक्स करीब 400 अंक तक चढ़ा।
क्यों कमजोर हो रहा है रुपया
विशेषज्ञों के अनुसार रुपये में गिरावट की मुख्य वजह भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
इंटरबैंक बाजार में गिरावट
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 92.44 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान करीब 92.43 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले करीब 13 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 92.30 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
शेयर बाजार में हल्की तेजी
रुपये में गिरावट के बीच घरेलू शेयर बाजार में कुछ मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 139 अंक बढ़कर 74,703.20 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 लगभग 51 अंक चढ़कर 23,202.20 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 104.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले स्तर से करीब 1.03 प्रतिशत ज्यादा है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की मुद्रा पर दबाव बढ़ जाता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को करीब 10,716.64 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। विदेशी निवेश की इस निकासी से भी रुपये की कमजोरी बढ़ी है।
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी घटा है। 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में यह 11.683 अरब डॉलर घटकर 716.810 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले यह बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
